कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

25000 भूमिहीन ग़रीब ज़मीन का अधिकार लेने के लिए दिल्ली का करेंगे घेराव

लगभग 56% ग्रामीण परिवार हैं भूमिहीन जिनमें से 30% भीषण गरीबी झेल रहे हैं।

महात्मा गाँधी के 149वे जयंती पर भूमि के अनुचित वितरण एवं बड़ी-बड़ी कंपनियों को ज़मीन के आवंटन के ख़िलाफ़ करीब 25,000 भूमिहीन ग्रामीण ग्वालियर से दिल्ली के लिए अपनी यात्रा शुरू करेंगे।

भारत के ग्रामीण इलाक़ों में काम करने वाले संगठन, एकता परिषद के बैनर तले देश के 17 राज्यों से भूमिहीन ग़रीब ‘जन आदोलन 2018’ का हिस्सा बन कर यात्रा करेंगे।

भारत में 56 प्रतिशत ग्रामीण परिवार भूमिहीन हैं और उनमें से 30 प्रतिशत परिवार भीषण रूप से ग़रीब एवं वंचित हैं। महिलाएं एवं दलित हमेशा ही ज़मीन हासिल करने की प्रक्रिया में भेदभाव एवं हिंसा का शिकार बनते हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी 6 अक्टूबर को मध्यप्रदेश में प्रदर्शनकारियों के हितों को लेकर संबोधित करेंगे।

‘बिल्डिंग इंडिया’ नाम से छपे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के घोषणापत्र में कहा गया है कि वह सभी के लिए पानी, बिजली और शौचालय से लैस घर सुनिश्चित करेगी।

प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मोदी सरकार नेशनल राईट टू होमस्टेड बिल को संसद में पेश करे जिसे ‘जन सत्याग्रह 2012’ के बदौलत भारतीय सरकार ने विकसित की थी। यह विधेयक हर ग्रामीण भूमिहीन परिवार को 10 डेसीमल (लगभग 4000 वर्ग फीट) घर की ज़मीन सुनिश्चित करेगा जो कि ग्रामीण परिवेश में एक घर, एक किचन गार्डन, एक भण्डारण और मवेशियों के रख-रखाव के लिए ज़रूरी है।

उन्होंने महिलाओं के बतौर किसान मान्यता को सुनिश्चित करने वाले स्वामीनाथन कमीशन द्वारा पेश किए गए विधेयक, महिला किसान एंटाइटलमेंट अधिनियम, को संसद में पारित करने की मांग भी की है।

उनकी दूसरी मांगे यह हैं –

भूमि विवाद के लंबित मामलों के फैसलों में तेज़ी बढ़ाने के लिए भूमि ट्रिब्यूनल एवं फास्ट-ट्रैक अदालतों की स्थापना।

पेसा अधिनयम, 1996 और वनाधिकार अधिनयम, 2006 को बेहतर लागू करने के लिए नए ‘निष्पादन एवं निगरानी’ के नए ढांचें तैयार करना।

राष्ट्रीय भूमि सुधार परिषद एवं भूमि सुधार के लिए टास्क फोर्स लागू करना।

भूमि पात्रता सीधे तौर पर लैंगिक समानता, लैंगिक हिंसा एवं प्रवास से जुड़ा हुआ है। एकता परिषद पिछले तीन दशकों से अलग स्तरों पर इन मुद्दों को उठाते हुए दलितों और आदिवासियों के भूमि अधिकारों के लिए लड़ता आ रहा है।

संगठन के मुताबिक़, जन आन्दोलन 2018 का एक उद्देश्य है देश के जिन भागों का शेहरीकरण हो चुका है उनमें भूमि अधिग्रहण और भूमि अधिकार को लेकर जागरूकता लाना। शहरी भारतीयों को इस यात्रा के साथ जोड़ने के लिए एकता परिषद ने ऑनलाइन क्राउडफंडिंग अभियान शुरू किया है।

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