कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षण पाने वाले 33 प्रतिशत युवा बेरोजगार: पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत दिया जाने वाला बजट आवंटन भी घटा दिया गया है.

केंद्र की मोदी सरकार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को लेकर तमाम तरह के दावे करती रही है. लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार यह दावे जमीन पर हवाहवाई हैं. लाइव मिंट ने अपनी रिपोर्ट में इस योजना की जमीनी सच्चाई का उजागर किया है. रिपोर्ट के अनुसार स्किल इंडिया के तहत युवाओं का एक सीमित तबका ही प्रशिक्षण पा रहा है और प्रशिक्षण पाने वालों में से अधिकतर या तो बेरोजगार हैं या श्रम बल से बाहर हैं. यानी कि पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (पीएलएफएस) 2017-18 के इकाई स्तर के आंकड़ों के अनुसार रोजगार दर की स्थिती काफी गंभीर है.

राष्ट्रीय स्तर पर, सिर्फ 1.8 प्रतिशत लोगों ने 2017-18 में औपचारिक रूप से व्यवसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने की सूचना दी है. जबकि 5.6 प्रतिशत लोगों ने अनौपचारिक रूप से (यानी कि व्यवसाय मे वंशानुगत मिलने वाला प्रशिक्षण, स्व-शिक्षा और नौकरी प्रशिक्षण ) व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने की सूचना दी. इसका मतलब है कि 93 प्रतिशत आबादी को औपचारिक या अनौपचारिक रुप से कोई व्यवसायिक या तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त नहीं हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार जिन लोगों को किसी तरह का प्रशिक्षण मिला है उनमें 15 से 29 साल तक का युवा वर्ग शामिल है. यानी कि 15 से 29 साल तक के युवा वर्ग के पास व्यवसायिक प्रशिक्षण होने के बाद उनके पास नौकरी की बेहतर संभावनाएं होंगी. लेकिन, लगभग (15 से 29 वर्ष) का 42 प्रतिशत युवा जिन्होंने औपचारिक रुप से तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त किया, वे श्रम बल का हिस्सा नहीं थे. (उन्होंने बताया कि वे काम नहीं कर रहे हैं या रोजगार के अवसर तलाश रहे हैं.) ऐसे में प्रशिक्षण प्राप्त नहीं करने वाले युवाओं में 62.3 प्रतिशत श्रम बल से बाहर थे. इसके साथ ही एक तिहाई पुरुष तथा औपचारिक रुप से प्रशिक्षण पाने वाली इससे कुछ अधिक महिलाएं भी श्रम बल से बाहर थी.

यहां सवाल यह है कि औपचारिक रुप से प्रशिक्षण पाने के बावजूद भी यह वलोग श्रम बल में शामिल क्यों नहीं हुए हैं. इसका जवाब यह है कि उन्हें नौकरी ढूंढने में कठिनाई हो सकती है. 2017-18 में औपचारिक रुप से प्रशिक्षित युवाओं में लगभग 33 प्रतिशत युवा बेरोजगार थे. जिनमें लगभग एक तिहाई प्रशिक्षित युवा पुरुष थे और एक तिहाई से अधिक प्रशिक्षित महिलाएं भी शामिल थीं.

वहीं, हाल ही में प्रशिक्षित युवाओं में बेरोजगारी दर पिछले साल की तुलना में अधिक था. इनमें से 40 प्रतिशत युवा बेरोजगार थे. बेरोजगारी दर अधिक होने और लगातार खोजने पर भी रोजगार नहीं मिलने के चलते अधिकतर युवा श्रम बल से बाहर हो गए.

सरकार के वादे के अनुसार युवाओं को रोजगार परक प्रशिक्षण दिया जाता है. लेकिन, युवा आबादी किस तरह का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही है, इस पर ग़ौर फ़रमाना भी ज़रूरी है. पीएलएफएस ने प्रशिक्षण के क्षेत्रों पर आंकड़ा एकत्र किया है. बता दें कि कौशल प्रशिक्षण का क्षेत्र 22 खंडों में बांटी गई है. इनमें से ज्यादातर प्रशिक्षू सूचना तकनीकी, परिधान और मकैनिकल इंजिनियरिंग के क्षेत्र में थे. इनमें भी महिला और पुरुष ने अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त किए हैं. कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, टेलीकॉम, मीडिया आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण पाने वालों में 80 फीसदी पुरुष थे. वहीं, ज्यादातर महिलाएं ने सौंदर्य, परिधान, हस्तशिल्प आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्राप्त किया.

पहली बार प्रधानमंत्री चुने जाने के एक साल बाद, नरेंद्र मोदी ने 2015 में बहुत ही धूमधाम से कौशल भारत योजना की शुरुआत की. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 10 मिलियन युवाओं को बेहतर अजीविका हासिल करने के लिए मुफ़्त में कौशल प्रदान करने का बखान किया था.

प्रधानमंत्री के इस विजनरी कार्यक्रम में सबकुछ अच्छा नहीं चल रहा है. इसका अंदाज़ा साल 2017 की शुरुआत में ही लग गया था. जब सरकार ने शारदा प्रसाद की अध्यक्षता में एक कमिटी गठित की थी. कमिटी ने पाया कि इस योजना के तहत लक्ष्य तो बहुत महत्वकांक्षी है. लेकिन, इसके लिए जो फंड जारी किया जा रहा है, वह भी पर्याप्त नहीं है. इन ख़बरों के बीच पीएलएफएस ने बताया है कि यदि वास्तव में कौशल विकास योजना सिर्फ चर्चा से अधिक है और इसे कामयाब बनाना है तो इसमें व्यापक सुधार की जरूरत है.

हालांकि, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य युवाओं को मुफ्त में प्रशिक्षण देना है, लेकिन, औपचारिक रुप से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अधिकांश युवाओं को प्रशिक्षण की लागत, पीएलएफएस आंकड़ा का खर्च उठाना पड़ा है. औपचारिक रूप से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले सिर्फ 16 प्रतिशत युवाओं को सरकार द्वार वित्त पोषित किया गया था. लगभग 73 फीसदी प्रशिक्षुओं ने पूरा प्रशिक्षण लिया है. आधे से अधिक युवाओं ने एक साल से अधिक प्रशिक्षण लिया है. वहीं, लगभग 30 प्रतिशत युवाओं ने दो साल से अधिक समय तक प्रशिक्षण लिया.

बता दें कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत दिया जाने वाला बजट आवंटन भी घटा दिया गया है. इससे एक संदेश मिलता है कि सरकार भी इसे लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं है.

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