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सुप्रसिद्ध नाटककार और कलाकार गिरीश कर्नाड नहीं रहे, 81 साल की उम्र में ली आख़िरी सांस

गिरीश कर्नाड विलक्षण प्रतिभाओं के धनी थे. उन्हें भारत सरकार की ओर से 1974 में पद्म श्री और 1992 में पद्म भूषण से नवाजा गया था.

सुप्रसिद्ध नाटककार और ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेता गिरीश कर्नाड का सोमवार को निधन हो गया है. 81 साल की उम्र में उन्होंने बेंगलुरु स्थित अपने निवास पर अंतिम सांस ली.

पिछले कुछ समय से गिरीश कर्नाड बीमार चल रहे थे. उन्होंने कई नामचीन फ़िल्मों में भी काम किया था. गिरीश कर्नाड विलक्षण प्रतिभाओं के धनी थे. उन्हें भारत सरकार की ओर से 1974 में पद्म श्री और 1992 में पद्म भूषण से नवाजा गया था. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र की डिग्री हासिल की थी.

उन्होंने कन्नड भाषा में नाटक लिखे थे, जिसका अंग्रेजी सहित कई भाषाओं में अनूदित किया गया था. गिरीश कर्नाड ने अभिनय और स्क्रीनराइटिंग के क्षेत्र में “संस्कार” (1970) से अपना करियर शुरू किया था. इसे पट्टभिराम रेड्डी ने निर्देशित किया था और इस फिल्म ने कन्नड सिनेमाओं के लिए दिया जाने वाला राष्ट्रपति अवार्ड जीता था.

हालांकि गिरीश कर्नाड ने एक एक्टर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन उनकी विशेष पहचान एक लेखक और विचारक की रही है. कर्नाड अपने समय के सबसे मुखर कलाकारों में से एक रहे हैं.

उन्होंने “नागमंडल”, “यायाति” और “तुगलक” जैसे नाटकों की रचना की थी, जिसकी प्रसिद्धि खूब हुई.

उन्होंने स्वामी और निशांत जैसी हिन्दी फ़िल्मों में भी काम किया था.

कर्नाड अभिव्यक्ति की आजादी के पैरोकार थे. बहुमुखी प्रतिभा के धनी कर्नाड ने अनेक नाटकों और फिल्मों में अभिनय किया जिनकी काफी सराहना हुई. उनके कन्नड़ भाषा में लिखे नाटकों का अंग्रेजी और कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया.

उन्होंने मशहूर कन्नड़ फिल्म ‘‘संस्कार’’ (1970) से अभिनय और पटकथा लेखन के क्षेत्र में पदार्पण किया. यह फिल्म यू आर अनंतमूर्ति के एक उपन्यास पर आधारित थी. फिल्म का निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया और फिल्म को कन्नड़ सिनेमा के लिए पहला राष्ट्रपति गोल्डन लोटस पुरस्कार मिला.

हालांकि, उन्होंने बतौर अभिनेता सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत की लेकिन उन्हें लेखक और विचारक के रूप में जाना जाता है.
कर्नाड अपनी पीढ़ी की सर्वाधिक प्रतिष्ठित कलात्मक आवाजों में से एक थे.

उनके टीवी धारावाहिकों में ‘‘मालगुडी डेज़’’ शामिल हैं जिसमें उन्होंने स्वामी के पिता की भूमिका निभाई. वह 90 के दशक की शुरुआत में दूरदर्शन पर विज्ञान पत्रिका ‘‘टर्निंग प्वाइंट’’ के प्रस्तोता भी थे.

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