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मनरेगा ने दूर की है ग़रीबी, असमानता दूर करने में भी रहा है अच्छा योगदान, एक रिपोर्ट का दावा

रिपोर्ट में कहा गया है कि मनरेगा पिछड़े वर्ग के लोगों के जीवन स्तर में सुधार के लिए अच्छी पहल रही है.

आज जब देश के राजनीतिक दल गरीबों के खाते में पैसे भेजने की बात कर रहे हैं, एक दशक पहले शुरू हुई एक योजना प्रशंसा बटोर रही है. हाल ही में हुए एक अध्ययन में मनरेगा स्कीम की तारीफ़ की गई है.

2006 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना लागू की गई थी. इसमें 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती है. वर्ल्ड बैंक के एक रिसर्चर क्लॉस डिनिंगर और अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के यान्यान ल्यू के साझा अध्ययन में पाया गया है कि देश के सभी हिस्से मुख्यत: आंध्रप्रदेश में इस योजना से अच्छी खासी मदद लोगों को मिली है.

इस अध्ययन में पाया गया है कि मनरेगा ने आंध्रप्रदेश के पांच जिले के लाभार्थियों को काफ़ी राहत पहुंचाई है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना का लाभ ले रहे लोग सामान्य लोगों से अधिक सुविधाओं के साथ जीवन-यापन कर रहे हैं. इसके साथ ही मनरेगा से जुड़ने के बाद इसके लाभार्थियों का पोषण भी सुधरा है. इस योजना से जुड़ने के एक साल बाद ही इसके लाभार्थियों को प्रोटीन और ऊर्जा के मामले में भी काफी राहत मिली है.

वही दो साल तक इस योजना का लाभ लेने वाले लोगों का जीवन स्तर और अधिक सुधरा हुआ पाया गया. अध्ययन में पाया गया है कि इस योजना ने समाज के वंचित तबके यानि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ग़रीब परिवारों को सबसे अधिक हुआ है. जिन परिवारों की मुखिया महिला या शारीरिक रूप से अक्षम थे उन्हें इस योजना ने काफ़ी लाभ पहुंचाया है.

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