कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

आदिवासी हित का किया प्रपंच और आदिवासियों से ही नहीं मिले अमित शाह

आदिवासी समाज ने कहा है कि बस्तर के आदिवासियों का पारंपरिक मुकुट पहन कर कोई आदिवासी हितैषी नहीं हो सकता।

बीते शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के नरहरपुर ब्लॉक में आगामी चुनाव के मद्देनजर आदिवासियों को रिझाने के लिए भाजपा ने आदिवासी सम्मेलन और बोनस तिहार कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री रमन सिंह के साथ तमाम भाजपा नेताओं ने भाग लिया।

इस सम्मेलन के बाद अमित शाह आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल के साथ भोजन कर चर्चा करने वाले थे। लेकिन उन्हें मालूम होना चाहिए था कि बस्तर का पारम्परिक बस्तरिया मुकुट पहन लेने से कोई आदिवासी हितैषी नहीं हो जाता है? इधर स्थानी रेस्ट हाउस में समाज का प्रतिनिधि मंडल अमित शाह के साथ भोजन का इन्तजार करता रहा और दूसरी ओर अमित शाह बिना समाज प्रमुखों से मिले हेलीकॉप्टर में बैठ कर निकल गए। इससे आदिवासी समाज अपने आप को अपमानित महसूस कर रहा है। भाजपा के इस आदिवासी सम्मेलन में आदिवासी ही उपेक्षित हो गए।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि आदिवासी समाज ने कहा कि आदिवासियों के नाम पर रखे गए इस सम्मेलन में आदिवासी समाज प्रमुखों को ही मंच पर जगह नहीं दी गई, सिर्फ उन्हें ही मंच पर बुलाया गया, जो पहले से ही भाजपा में शामिल हैं। आदिवासी समाज ने नाराज़गी जताते हुए कहा है कि उन्हें निमन्त्रण देकर इस सम्मेलन में बुलाया गया था, वे ख़ुद नहीं आए थे और बावजूद इसके उनकी बेईज्ज़ती की जा रही थी।

नरहरपुर के आदिवासी युवा सुखमन सलाम ने बताया, “आदिवासी सम्मेलन होता तो वे हमारे सभा में आते, और न कि हम उनकी सभा में।” भाजपा ने अपने अटल विकास यात्रा के सभा को आदिवासी सम्मेलन का नाम दिया ताकि लगे की आदिवासियों के साथ भाजपा सरकार कभी भी उपेक्षा नहीं कर रही है और आदिवासियों को पता तक नहीं कि उनका कोई सम्मेलन भी हो रहा है।

लेखक एक स्वतन्त्र पत्रकार हैं और छत्तीसगढ़ में सक्रीय रूप से कार्यरत हैं।

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