कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

वंदे भारत एक्सप्रेस पर आप समर्थकों ने नहीं किया पथराव, सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है झूठ

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल

“वंदेभारत एक्सप्रेस पर पथराव करने वाले दयाबस्ती दिल्ली से आप पार्टी के 4 कार्यकर्ता हिरासत में। यही बेवकुफ राजनीति बदलने आये थे” – यह संदेश इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल है। इस संदेश से यह दर्शाने की कोशिश की गई है कि बिना इंजन वाली वंदे भारत एक्सप्रेस, जिसे ट्रेन 18 भी कहा जाता है, के साथ 2 फरवरी, 2019 को दया बस्ती, दिल्ली से चार आप कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़फोड़ की गई।

इस संदेश को फेसबुक और ट्विटर पर कई यूजर्स ने पोस्ट किया है।

कोई गिरफ्तारी नहीं

ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि कथित रूप से वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव के लिए गिरफ्तार चार लोगों के बारे में यह दावा कि वे आप समर्थक हैं, झूठा और दुर्भावनापूर्ण है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में अबतक कोई गिरफ्तारी नहीं की है। NDTV द्वारा 2 फरवरी को प्रकाशित लेख में कहा गया, “रेलवे ने बताया कि यह ट्रेन, इलाहाबाद तक की अपनी परीक्षण यात्रा शुरू करने हेतु नई दिल्ली पहुंचने के लिए शुक्रवार को लगभग 11:03 बजे जब शकूरबस्ती से रवाना हुई, तभी हुई इस घटना से किसी को कोई चोट नहीं आई और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।”- (अनुवादित) सुरक्षा के लिए नई दिल्ली स्टेशन तक ट्रेन में साथ जा रहे रेलवे पुलिस बल के जवानों ने स्टेशन पर पहुंचने पर अधिकारियों को पथराव की घटना की सूचना दी। प्रारंभिक रिपोर्टों में वास्तव में बताया गया था कि यह हमला दया बस्ती के निकट हुआ था।

बाद में खबरें सामने आईं कि एक पत्थर सदर इलाके में फेंका गया नाकि दया बस्ती में। द फाइनेंशियल एक्सप्रेस द्वारा 4 फरवरी, 2019 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, “सदर इलाके में खोजबीन की गई, मगर कोई संदिग्ध नहीं मिला। इस बीच भारतीय रेल ने यह भी सूचना दी कि पत्थर फेंकने की घटना में कोई घायल नहीं हुआ था। यह घटना, ट्रेन 18 पर दिल्ली और आगरा के बीच परीक्षण यात्रा के दौरान हुई पत्थरबाजी की ऐसी ही घटना के बमुश्किल एक महीने के बाद घटित हुई।”- (अनुवादित) इस ट्रेन पर पिछली बार 20 दिसंबर, 2018 को हमला हुआ था।

निष्कर्ष के तौर पर दया बस्ती के चार आप समर्थकों के वंदे भारत ट्रेन पर हमला करने का यह संदेश पूरी तरह झूठा है। पहले भी, शरारती तत्वों द्वारा इस ट्रेन से संबंधित पिछले मामले में, विपक्ष के नेता पर आरोप लगाते हुए उन्हें ‘विकास-विरोधी’ बताने का प्रयास किया गया था।

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