कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

एबीवीपी के गुंडों ने प्रोफेसर को देशद्रोही बताकर पैरों में गिरने के लिए किया मजबूर

कॉलेज के प्रधानाचार्य सोहोनी ने कहा कि डॉ गुप्ता का कोई दोष नहीं है।

आरएसएस की छात्र यूनिट अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की गुंडागर्दी एक बार फिर सामने आई है। मंदसौर के एक सरकारी कॉलेज में एक वरिष्ठ प्रोफ़ेसर ने कक्षा के बाहर नारेबाजी करने से रोका तो अभाविप के कार्यकर्ताओं ने उन्हें राष्ट्र विरोधी करार दे दिया। नौबत यहां तक आ पहुँची कि प्रोफ़ेसर डॉ. दिनेश गुप्ता को पैर छूकर माफ़ी मांगनी पड़ी।
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक मंदसौर के राजीव गांधी पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ आर के सोहनी का कहना है कि कॉलेज के शिक्षक डॉ दिनेश गुप्ता बुधवार को पढ़ा रहे थे। इसी दौरान चौथे सेमेस्टर के परीक्षा परिणाम में देरी को लेकर एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने नारा लगाना शुरू कर दिया।
 इसके चलते कक्षा में व्यवधान उत्पन्न होने लगा। डॉ गुप्ता ने उनसे नारे लगाने के लिए मना किया तो अभाविप कार्यकर्ताओं ने उन्हें “राष्ट्र विरोधी” कहा। अभाविप कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्हें “वंदे मातरम् ” और “भारत माता की जय” का नारा लगाने से रोका गया, जो देशद्रोह है। उन्होंने कथित तौर पर राष्ट्र विरोधी काम करने के लिए प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज करने की धमकी भी दी। साथ ही उन्हें माफ़ी मांगने को भी कहा।
गुरुवार को आए एक वीडियो में डॉ गुप्ता को ज़ाहिर तौर पर परेशान देखा जा सकता है। वे एबीवीपी कार्यकर्ताओं के पैर छूने के लिए आगे बढ़ रहे हैं। वीडियो में डॉ गुप्ता को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि वह एबीवीपी कार्यकर्ताओं की तुलना में अधिक देशभक्त हैं और देशभक्ति के नारे एक बार नहीं बल्कि हज़ार बार दोहराएंगे, लेकिन किसी और के कहने पर नहीं।
कॉलेज के प्रधानाचार्य सोहोनी ने कहा कि डॉ गुप्ता का कोई दोष नहीं है।
एबीवीपी कार्यकर्ता पवन शर्मा का कहना है कि डॉ गुप्ता के द्वारा छात्रों के पैरों को छूने का कार्य “प्रचार स्टंट” था। शर्मा और अन्य एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने इनकार किया है कि उन्होंने डॉ गुप्ता से माफ़ी मांगने को कहा। हालांकि, ये ज़ोर देकर कहा था कि देशभक्ति के नारे लगाना उनका अधिकार है और जो उन्हें ऐसा करने से रोकेगा वह देशभक्त कहलाने के क़ाबिल नहीं है।
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