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एबीवीपी की गुंडागर्दी: अहमदाबाद विश्वविद्यालय में अब नहीं पढ़ाएंगे इतिहासकार रामचंद्र गुहा

“एबीवीपी की वजह से रामचंद्र गुहा के ऊपर काफी ख़तरा था और उनके ऊपर हमला हो सकता था.”

प्रसिद्ध इतिहासकार एवं जीवनी लेखक रामचंद्र गुहा अब गुजरात के अहमदाबाद विश्वविद्यालय में नहीं पढ़ाएंगे. इसकी पुष्टि उन्होंने अपने एक ट्वीट के ज़रिये की. रामचंद्र गुहा ने अपने ट्वीट लिखा, “मेरे नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारणमैं अहमदाबाद विश्वविद्यालय में शामिल नहीं हो पाऊंगा। मैं एयू को शुभकामनायें देता हूँइसमें अच्छे विभाग और एक उत्कृष्ट कुलपति हैं. गांधीजी की आत्मा एक दिन अपने मूल गुजरात में दोबारा ज़िंदा हो.

ज्ञात हो कि 16 अक्टूबर को अहमदाबाद विश्वविद्यालय द्वारा रामचंद्र गुहा की मानविकी के श्रेनिक लालभाई चेयर प्रोफेसर और विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेस में गांधी विंटर स्कूल के निदेशक के रूप में नियुक्ति की थी. लेकिन गुहा की नियुक्ति को लेकर आरएसएस की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा 19 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन किया गया था और उनके द्वारा मांग की गई थी कि गुहा की नियुक्ति को रद्द कर दिया जाए. एबीवीपी ने रामचंद्र गुहा की किताबें भारत की हिंदू संस्कृति की कड़ी आलोचना की.

द वायर की रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद के एबीवीपी सचिव प्रवीन देसाई ने कहा, “हमने अहमदाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार बीएम शाह से बात की और उनसे कहा कि हमें विश्वविद्यालय में बुद्धिजीवियों की ज़रुरत हैदेशद्रोहियों की नहीं. ऐसे लोगों को अर्बन नक्सल भी कहा जा सकता है.” अपने विवादित बयान को जारी रखते हुए देसाई ने कहा, “हमने गुहा की किताब से राष्ट्रविरोधी चीजें रजिस्ट्रार के सामने पेश की थी. हमने कहा था कि आप जिस व्यक्ति को बुला रहे हैं वो वामपंथी है. यदि गुहा को गुजरात बुलाया जाता है तो जेएनयू की तरह यहां भी राष्ट्रविरोधी भावनाएं पनप जाएंगी.

एबीवीपी द्वारा वाइस चांसलर को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया, ‘उनके लेखों ने बांटने की प्रवृत्तियोंव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अलगाववादव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर आतंकवादियों को मुक्त करने और जम्मू-कश्मीर को भारतीय संघ से अलग करने जैसी चीज़ों को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) और सेंट्रल यूनिवर्सिटीहैदराबाद जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में प्रोत्साहित किया है.

वहीं दूसरी ओर एक सूत्र ने नाम न लिखने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एबीवीपी की वजह से रामचंद्र गुहा के ऊपर काफी खतरा था और उनके ऊपर हमला हो सकता था.

विडम्बना की बात यह है कि एक प्रसिद्ध इतिहासकार और जीवनी लेखक जिसकी अहमदाबाद विश्वविद्यालय में नियुक्ति होने वाली थी, एबीवीपी के गुंडागर्दी के कारण उन्होंने विश्वविद्यालय में शामिल न होने का निर्णय कर लिया. अब क्या इस देश में विश्वविद्यालय में किसकी नियुक्ति की जाए और किसकी नहींइस बात का फैसला एबीवीपी करेगी?

 

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