कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अभिनेत्री-गायिका रूमा गुहा ठाकुरता का निधन

वह 84 वर्ष की थीं और उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थीं.

अभिनेत्री एवं गायिका रूमा गुहा ठाकुरता का यहां स्थित उनके आवास में सोमवार की सुबह नींद में निधन हो गया. वह 84 वर्ष की थीं और उम्र संबंधी बीमारियों से पीड़ित थीं. उनके परिवार में गायक अमित कुमार सहित दो पुत्र और एक पुत्री हैं. रूमा ने दो शादियां की थीं.

दूसरे विवाह से उनके पुत्र अयान गुहा ठाकुरता ने बताया कि उनकी मां का आज सुबह नींद में ही देहांत हो गया. ‘‘उन्होंने संभवत: सुबह छह बजे से सवा छह बजे के बीच आखिरी श्वांस ली.’’

कोलकाता में तीन नवंबर 1934 को जन्मी रूमा नृत्य में गहरी रुचि रखती थीं. 1950 के दशक के शुरू में तत्कालीन बॉम्बे जाने के बाद उन्होंने गायक किशोर कुमार से विवाह किया था.

गायक अमित कुमार रूमा और किशोर कुमार की ही संतान हैं.

रूमा और किशोर कुमार 1958 में अलग हो गए थे. बाद में रूमा ने लेखक-निर्देशक अरूप गुहा ठाकुरता से विवाह किया और उनकी दो संतान… स्रोमोना तथा अयान गुहा ठाकुरता हुईं.

अयान ने बताया कि उनकी मां करीब तीन माह तक मुंबई में अमित कुमार के साथ रहने के बाद एक माह पहले ही कोलकाता लौटी थीं.

अयान ने कहा ‘‘दादा :अमित: आज शाम यहां आ रहे हैं. :मां के अंतिम संस्कार के बारे में: सभी निर्णय वही करेंगे.’’

फिल्म निर्देशक सत्यजीत रे की भतीजी रूमा ने 60 से अधिक फिल्मों में काम किया.

उनकी ज्यादातर फिल्मों का निर्माण सत्यजीत रे, तपन सिन्हा, तरुण मजूमदार, राजन तरफदार, अर्पणा सेन और मीरा नायर जैसे प्रख्यात निर्देशकों ने किया.

रूमा की यादगार फिल्में ‘गंगा’ (1959), ‘अभिजान’ (1962), ‘पालातक’ (1963), ‘एंटनी फिरंगी’ (1967), ‘80 ते असियो ना’ (1967), ‘बालिका बधू’ (1967), ‘दादर कीर्ति’ (1980), ‘36 चौरंगीलेन’ (1981), ‘अमृता कुंभेर सन्धाने’(1982), ‘भालोबाशा भालोबाशा’ (1985) और ‘व्हीलचेयर’ (1994) आदि हैं.

उन्होंने कई हिन्दी फिल्मों में भी काम किया जिनमें ‘ज्वार भाटा’ (1944), ‘मशाल’ (1950), ‘अफसर’ (1950), ‘राग रंग’ (1952) और ‘नेमसेक’ (2006) प्रमुख हैं. ‘ज्वार भाटा’ रूमा की पहली और ‘नेमसेक’ आखिरी फिल्म थी.

कई फिल्मों के लिए उन्होंने पार्श्व गायन भी किया.

वर्ष 1958 में रूमा ने गीत और नृत्य समूह ‘कलकत्ता यूथ कोयर’ की स्थापना भी की. इस समूह के लोकप्रिय लोक गीतों में ‘आज जोतो जुद्धबाज’, ‘भारतबरषो सुरजेर एक नाम’, ‘ओ गंगा बोइचो केनो’ और ‘वक्त की आवाज’ आदि प्रमुख हैं.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने रूमा के निधन पर शोक तथा उनके परिजनों के प्रति संवेदना जाहिर की है.

ममता ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ‘‘रूमा गुहा ठाकुरता के निधन से दुखी हूं. सिनेमा और संगीत की दुनिया में उनका योगदान अविस्मरणीय है. उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मैं संवेदना जाहिर करती हूं.’’

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