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चुनाव में सेना के नाम का इस्तेमाल: सेना के 150 से अधिक पूर्व अधिकारियों की चिट्ठी पर संज्ञान नहीं ले रहा राष्ट्रपति भवन, निराश एडमिरल लक्ष्मीनारायण ने फिर लिखा पत्र

एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि सशस्त्र बलों की धर्म-निरपेक्ष और ग़ैर-राजनीतिक छवि बरकरार रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं.

भारतीय सेना के पूर्व अधिकारी एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास ने एक बार फिर राष्ट्रपति रामनाथ कोबिंद को पत्र लिखा है. इससे पहले चुनाव प्रचार में सेना के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल की निंदा करते हुए सेना के 150 पूर्व अधिकारियों ने राष्ट्रपति भवन को चिट्ठी लिखी थी, जिस पर कोई सुनवाई नहीं हुई.

इस पत्र में एडमिरल लक्ष्मीनारायण रामदास ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि सशस्त्र बलों की धर्म-निरपेक्ष और ग़ैर-राजनीतिक छवि बरकरार रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएं.

इस मामले में राष्ट्रपति को लिखी दूसरी चिट्ठी में एडमिरल रामदास ने लिखा है कि पूर्व में राष्ट्रपति भवन के तीन आधिकारिक ईमेल आईडी पर पत्र भेजे जाने के बावजूद भी कोई संज्ञान नहीं लिया गया है.

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव ने कहा है कि ईमेल पर भेजी गई चिट्ठी हार्ड कॉपी के रूप में स्पीड पोस्ट के जरिए भी मिली थी. लेकिन, इस पर किसी के हस्ताक्षर नहीं थे, इसलिए इन्हें “एनएफए” मार्क कर दिया गया.

राष्ट्रपति के प्रेस सचिव के इस बयान पर एडमिरल रामदास ने हैरानी जताई है. उन्होंने कहा है कि इस पत्र पर मेजर पी चौधरी के दस्तख़त थे.

इस पत्र में एडमिरल रामदास ने राष्ट्रपति को यह भी बताया है कि सेना के दो पूर्व अधिकारियों द्वारा पूर्ववर्ती चिट्ठी से पाला झाड़ लेने के बाद किस तरह से सेना के154 पूर्व अधिकारियों की चिंता को नज़र अंदाज किया जा रहा है. जिन दो अधिकारियों ने राष्ट्रपति के पास लिखे पत्र से दूरी बना ली थी, अब उनका नाम सूची से हटा दिया गया है. लेकिन, फिर भी सेना के राजनीतिकरण से परेशान लोग लगातार मौजूदा सरकार के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं. अभी तक सेना के 422 पूर्व अधिकारियों ने चुनावी फायदे के लिए सेना के राजनीतिक इस्तेमाल पर विरोध जताया है.

इस पत्र के आखिर में एडमिरल रामदास ने लिखा है कि कृपया राष्ट्रपति भवन यह सुनिश्चित करे कि उन्हें यह पत्र प्राप्त हो चुका है.

इससे पहले महाराष्ट्र के लातूर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने युवा वोटरों से अपील की थी कि वो वोट देते समय पुलवामा हमले के शहीदों और बालाकोट एयर स्ट्राइक में हिस्सा लेने वाले जवानों को ध्यान में रखकर वोट दें.

इसके बाद से प्रधानमंत्री कई बार अपनी चुनावी रैलियों में पुलवामा हमले और बालाकोट एयर स्ट्राइक का जिक्र कर चुके हैं. लेकिन, चुनाव आयोग ने अभी तक इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है. स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों के मुताबिक इस तरह के बयान सीधे तौर पर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माने जाते हैं.

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