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3 लाख लोगों के सर्वे में निकली अचंभित करने वाली बात: ज्यादातर लोगों ने माना- रोज़गार और स्वास्थ्य जैसे मामले में मोदी का काम निराशाजनक

इस सर्वे में पता चला कि अधिकतर लोग रोजगार के अवसर को सबसे अहम मुद्दा मानते हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले एक अखिल भारतीय सर्वे से जो जानकारी सामने आई है, उसमें मोदी सरकार की विफ़लता नज़र आती है. एसोशिएसन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्मर्स ने 3 लाख से ज्यादा लोगों के बीच सर्वे कराया है, जिसमें मोदी सरकार के कार्यकाल को औसत से भी कमजोर माना गया है.

सर्वे में कहा गया है कि मतदाताओं की रूचि वाले दस मुद्दों पर मोदी सरकार का प्रदर्शन औसत से भी कम रहा है. कुल पांच अंकों में से मोदी सरकार को तीन से भी कम अंक हासिल हुए हैं.

खास तौर पर सरकार ने रोजगार के अवसरों के मापदंडों पर खराब प्रदर्शन किया है. मतदाताओं के बीच रोजगार पहली प्राथमिकता के तौर पर देखा गया. टॉप-10 की प्राथमिकताओं में भाजपा सरकार का प्रदर्शन औसत से भी नीचे का रहा है.

यहां ध्यान देने वाली बात है कि खेती से जुड़े मुद्दे वोटरों की प्राथमिकताओं में टॉप-10 में मजबूती से खड़े हैं. उदाहरण के तौर पर खेती के लिए पानी की उपलब्धता छठें नंबर पर आती है. इसके बाद कृषि लोन की उपलब्धता, फ़सलों पर मिलने वाले उचित दाम और खेती के लिए बीज और खाद पर सब्सिडी का नंबर आता है.

इसके अलावा सरकार का सबसे खराब प्रदर्शन सार्वजनिक भूमि का अतिक्रमण, नौकरी के लिए ट्रेनिंग और खाद्य पदार्थों के दाम में कमी के मामले में भी मोदी सरकार का प्रदर्शन ख़राब रहा है. सर्वे के मुताबिक रक्षा, मिलिट्री, आतंकवाद और भ्रष्टाचार मिटाने के मुद्दे पर भी मोदी सरकार का प्रदर्शन सबसे ख़राब रहा है.

मतदाताओं की प्राथमिकताओं का आकलन करने के लिए उन्हें शीर्ष पांच प्राथमिकताओं को सूचीबद्ध करने के लिए कहा गया. इसके बाद अच्छे, औसत और बुरे के तीन-स्तरीय पैमाने पर सरकार के प्रदर्शन का विश्लेषण किया गया.

वोटरों के लिए आतंकवाद और सैन्य सुरक्षा जैसे मामले काफ़ी बाद में आते हैं. एडीआर के अनुसार इन क्षेत्रों में प्रभावी प्रशासन की कमी के कारण भारतीय मतदाता को वंचित होना पड़ रहा है.

ग़ौरतलब है कि 36.67 प्रतिशत मतदाताओं का मानना है कि वे आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को वोट देते हैं क्योंकि उन्हें उनके आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में कोई जानकारी नहीं होती. 35.89 प्रतिशत लोग मानते हैं कि अगर आपराधिक छवि का उम्मीदवार पूर्व में अच्छे काम किया हो तो, उसे वोट देने में कोई हर्ज़ नहीं होता. यद्यपि 97.86 प्रतिशत लोगों का मानना है कि आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को विधानसभा या लोकसभा में नहीं जाना चाहिए. वही, मात्र 35.20 प्रतिशत वोटरों का मानना है कि उन्हें अपने उम्मीदवार के आपराधिक छवि के बारे में जानकारी मिल सकती है.

देशभर के कुल 534 लोकसभा क्षेत्रों में कराए गए इस सर्वे में कुल 2,73,487 वोटरों ने हिस्सा लिया. यह सर्वे अक्टूबर 2018 से दिसम्बर 2018 के बीच कराया गया था.

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