कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अहमदाबाद: संविधान दिवस के मौके पर 2000 से अधिक दलितों ने निकाली संविधान बचाओ यात्रा

यात्रा में मौजूद लोगों ने कहा, संविधान को किसी भी हाल में बचाकर रहेंगे.

संविधान दिवस के मौके पर रविवार को दलित नेता जिग्नेश मेवानी के संगठन राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच द्वारा संविधान बचाओ यात्रा का आयोजन किया गया था. इस यात्रा में 2000 से अधिक दलितों ने हिस्सा लेकर जय भीम जैसे कई नारे लगाए. यह यात्रा अहमदाबाद के चांद खेड़ा से गोमतीपुर होते हुए 26 किलोमीटर दूर अमराई वाड़ी में जाकर समाप्त हुई.

जनचौक की ख़बर के अनुसार यात्रा जहां भी पहुंची आम जनता उनके स्वागत में खड़ी हो गई. जनसभा को संबोधित करते हुए दलित मुस्लिम एकता मंच के कलीम सिद्दीकी ने कहा, “अच्छा हुआ संविधान निर्माण बाबा साहेब की अगुवाई में हुआ. यदि किसी मुस्लिम की अगुवाई में हुआ होता तो आज संघी खुलकर कहते हम संविधान को नहीं मानते.” उन्होंने कहा कि भारत के संविधान के साथ दलित समाज के जज़्बात जुड़े हुए हैं. लेकिन संविधान बचाने की ज़िम्मेदारी देश के सभी नागरिकों की है.

सभा में अपनी बात रखते हुए कमलेश कटारिया ने कहा, “1947 से पहले महिलाएं पैर की जूती हुआ करती थींलेकिन संविधान ने महिलाओं को अधिकार देकर सिंर का ताज बना दिया.” जगदीश चावड़ा ने आरोप लगाते हुए कहा, “मनुवादी लोग संविधान को बदलना चाहते हैं. अब तक वे 47 जगह छेड़छाड़ कर चुके हैं. लेकिन हम शांति या क्रांति से किसी भी हाल में संविधान को बचाएंगे.”

महेश भाई परमार ने भाषण में कहा, चीन और जापान जैसे देश खुद को विश्व के नक़्शे में आगे देखने के लिए हर प्रकार के उपाय कर रहे हैं और हम मंदिर वहीं बनाएंगे कह रहे हैं. देश में गांधीवाद,समाजवादमार्क्सवाद है लेकिन देश अंबेडरवाद से ही बचेगा. अंबेडकर आंदोलन केवल दलित समाज तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि यह आंदोलन पूरे समाज का होना चाहिए. हम लोग संविधान के लिए बलिदान भी देंगे लेकिन संविधान पर आंच नहीं आने देंगे.

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