कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राष्ट्रीय महिला आयोग में सभी पद खाली, एक अध्यक्ष के सहारे चल रहा है आयोग

पदों की नियुक्तियों का मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संभाला जाता है.

देश में महिला सुरक्षा मामलों को देखने वाली भारत की सबसे बड़ी संस्था राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) में एक भी सदस्य कार्यरत नहीं है. राष्ट्रीय महिला आयोग में पांच सदस्यों के पद होते हैं. जिनमें से इस समय सभी पद खाली हैं.

आयोग के आखिरी सदस्य आलोक रावत थे जो बीते 19 अक्टूबर को अपने पद से रिटायर हो गए हैं. वर्मा एकमात्र ऐसे पुरुष सदस्य हैं जिनकी नियुक्ति महिला आयोग में हुई थी. फिलहाल आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा सारा कार्यभार संभाल रही है. द वायर की रिपोर्ट के अनुसार पिछले सदस्यों के तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद से एक भी सदस्य की अब तक नियुक्ति नहीं हुई है.

दरअसल, इस आयोग में पांच पदों में से दो पद अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) की महिला उम्मीदवार के लिए आरक्षित होते हैं. यह आरक्षण इसलिए है ताकि पिछड़े समुदायों की शिकायतें आयोग द्वारा सुनी जाएं. लेकिन एससी और एसटी सदस्य शमीना शफिक और लालदिंगलिआनी सैलो के रिटायर होने के बाद से यह पद अप्रैल 2015 और सितंबर 2016 से खाली ही हैं. आयोग की अन्य सदस्य सुषमा साहू का कार्यकाल भी अगस्त में समाप्त हो गया था. वहीं इस महीने आयोग की सदस्य रेखा शर्मा का कार्यकाल समाप्त होने की स्थिति में उन्हें आयोग की अध्यक्ष बना दिया गया है.

आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा का कहना है कि “हमारे ऊपर काम का भार ज्यादा बढ़ गया है, खासकर इसलिए क्योंकि सभी पांच पद खाली हैं लेकिन हम किसी तरह से कार्य को संभाल रहे हैं. पदों की नियुक्तियों का मुद्दा प्रधानमंत्री कार्यालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा संभाला जाता है. हमें हाल ही में सूचना मिली है कि सभी पांच सदस्यों के लिए चयन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है.” नियुक्तियों को लेकर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (डब्ल्यूसीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि, ‘प्रस्ताव प्रक्रिया में है और रिक्त पद जल्द ही भरे जाएंगे.’

वहीं दूसरी ओर मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि 2015 से लंबित एनसीडब्ल्यू नियुक्तियों के अलावा अप्रैल 2015 से पीएमओ के साथ महत्वपूर्ण महिला के लिए राष्ट्रीय आयोग विधेयक मसौदा लंबित है जबकि अरुण जेटली के नेतृत्व वाले मंत्रियों ने आयोग को मजबूत करने के लिए मसौदे विधेयक को मंजूरी दे दी थी. यदि विधेयक पारित हो जाता है तो आयोग को सिविल कोर्ट जितनी शक्तियां प्राप्त हो जाएंगी. जिससे अपराधियों पर जुर्माना लगाना, दस्तावेजों की मांग और आदेश का उल्लंघन करने पर किसी मजिस्ट्रेट से गिरफ़्तारी वारंट जारी करने के आदेश देने का अधिकार मिल जाएगा. हालांकि मंत्रियों के समूह ने एनसीडब्ल्यू को राजनीतिक नियुक्तियों की मौजूदा व्यवस्था से दूर करने की सिफारिश की थी. इस विधयेक को अभी संसद में पेश किया जाना बाकी है.

ज्ञात हो कि, घरेलू हिंसा और अन्य शिकायतों के नियमित मामलों को संभालने के अलावा आयोग ने हाल ही में मीटू से जुड़े मामलों को संभालने के लिए (ncw.metoo@gmail.com) एक ईमेल आईडी की घोषणा की थी.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+