कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बेरोज़गारी से परेशान युवाओं के भीतर बारूद पनप रहा है, जब यह फूटेगा मोदी सरकार संभाल नहीं पाएगी: ‘युवा हल्ला बोल’ के नेतृत्वकर्ता अनुपम से खास बातचीत

'हम युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए आवाज़ उठा रहे हैं. क्योंकि, युवाओं का भविष्य बेहतर होगा तभी देश का भविष्य बेहतर होगा.'

सरकारी नौकरियों में हो रही धांधली और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ शुरू हुआ राष्ट्रीय आंदोलन ‘युवा हल्ला बोल’ व्यापक स्तर पर लगातार अपनी आवाज़ बुलंद करते आ रहा है. देश के अलग-अलग कोनों से युवा इस आंदोलन से जुड़ रहे हैं और केंद्र सरकार की शिक्षा विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ हल्ला बोल रहे हैं.

युवा हल्ला बोल के नेतृत्वकर्ता और स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अनुपम ने न्यूज़सेंट्रल24×7 से नौजवानों की समस्याओं और आंदोलन की आगामी योजना को लेकर बातचीत की.

सवाल: युवा हल्ला बोल अब तक ज़मीनी स्तर पर कितना कारगर साबित हुआ है?

जवाब: देश में बेरोज़गारी एक विकराल समस्या बन चुकी है. राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) के आंकड़े को पहले केंद्र सरकार ने छिपाने की कोशिश की. लेकिन, लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद सरकार ने उसे जारी किया. जिसमें पता लगा कि बेरोज़गारी दर 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ चुकी है. आज़ाद भारत में इस वक्त सबसे ज्यादा बेरोज़गारी है. सिर्फ बेरोज़गारी दर नहीं बढ़ी है बल्कि देश का लेबर फोर्स भी सिमट रहा है. वैसे जब लेबर फोर्स सिमटता है तो रोज़गार की दर बेहतर होती है. लेकिन, यहां लेबर फोर्स भी सिमट रहा है और बेरोज़गारी दर भी बढ़ रहा है. लोगों ने रोज़गार की उम्मीद रखना भी छोड़ा दिया है.

फरवरी 2018 में केंद्र सरकार की नौकरी की सबसे बड़ी एजेंसी स्टाफ सेलेक्शन कमीशन के माध्यम से सालाना लगभग 2 करोड़ युवा नौकरियों के लिए अप्लाई करते हैं. एसएससी के सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक का मामला सामने आया और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार दिखा. इसे लेकर फरवरी 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं का आंदोलन शुरू हुआ और वहीं से युवा हल्ला बोल का जन्म हुआ. धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया.

अब सरकारी नौकरियों के किसी भी सेक्टर में धांधली हो रही है अभियार्थियों की समस्या आंदोलन का रूप ले रही है. पिछले 2 साल से लेकर अब युवा हल्ला बोल बेरोज़गार युवाओं के लिए उस बैनर के तौर पर उभरा है जो देश के युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए आवाज़ उठा रहा है. क्योंकि युवाओं का भविष्य बेहतर होगा तभी देश का भविष्य बेहतर होगा.

सवाल: लोकसभा चुनाव से पहले युवा हल्ला बोल अभियान के तहत सरकार के ख़िलाफ़  युवा पंचायत के साथ कई मुहिम चलाई गई. इसके बावजूद भी मोदी सरकार की भारी बहुमत से जीत हुई. ऐसे में क्या ये कहा जाए कि युवा ख़ुद इस मुद्दे को इतनी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं?

जवाब: सीधे तौर पर इस चीज़ को नहीं माना जा सकता है. मैं नहीं मानता कि युवा बेरोज़गारी के मुद्दे को नज़रअंदाज़ कर रहे हैं. लेकिन, यह सही है कि बेरोज़गारी के मामले में मोदी सरकार पूरी तरह से विफल हुई और इस मसले पर वह खुद का डिफेंस भी नहीं कर पा रही है. लेकिन, विपक्ष भी युवाओं की समस्याओं को लेकर आवाज़ बुलंद नहीं कर पाई ना कोई संघर्ष किया. ऐसे में युवाओं के सामने एक तरफ मोदी सरकार थी और दूसरी तरफ वो विपक्ष था जिसके पास बेरोज़गारी की समस्या के समाधान के लिए कोई खाका नहीं था.

विपक्ष के कमजोर होने के कारण युवाओं के पास कोई विकल्प नहीं था. लोकसभा चुनाव में हमने देखा मोदी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर लोगों को एकत्रित किया. ऐसे में युवाओं ने बेरोज़गारी को पीछे छोड़ दिया और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर वोट दिया है. लेकिन, युवा ये जानते हैं कि बेरोज़गारी के नाम पर मोदी सरकार विफल रही है. हमारे आंदोलन में कई युवा हैं जिन्होंने मोदी सरकार को वोट दिया है. लेकिन, बेरोज़गारी के नाम पर मोदी सरकार के ख़िलाफ़ लड़ रहे हैं.

सवाल: राष्ट्रवाद के पीछे बेरोज़गारी की समस्या क्यों छुप रही है ?

जवाब: यह गहरी चिंता का विषय है. ऐसा नहीं है कि राष्ट्रवाद का मुद्दा ग़लत है. लेकिन, अफसोस यह है कि राष्ट्रवाद का जो माहौल बनाया गया है उसमें काफी कुछ था जो झूठ, प्रोपेगेंडा और मेनस्ट्रीम मीडिया के डायवर्जन के आधार पर बनाया गया. राष्ट्रीय सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाया गया और इसकी आड़ में युवाओं के लिए रोज़गार, भष्ट्राचार, गंगा सफाई या नोटबंदी जैसे असल मुद्दें को छुपा दिया गया. इसमें कोई शक नहीं है कि बीजेपी ने युवाओं और किसानों को धोखा है. लेकिन, यह विपक्ष और हमलोगों की भी एक बहुत बड़ी विफलता है कि हम असल मुद्दों को उस स्तर तक नहीं ले जा सके, जिससे की ये लोगों के लिए निर्णायक बन जाए.

हम लगातार काम कर रहे थे. लोकसभा चुनाव के बीच हमने तय किया कि हम चुनाव नहीं लड़ेंगे और असल मुद्दों पर काम करते रहेंगे. हमने कैंपन चालाया ‘वोट मेरा, देश मेरा, मुद्दा मेरा’. कोई भी पार्टी जीते लेकिन चुनाव असल मुद्दों पर लड़ा जाना चाहिए. पिछले 4-5 सालों से हम किसान, नौजवान और भ्रष्ट्राचार से जुड़े मुद्दें लगातार उठा रहे हैं. देश की आबादी रोज़गार के मसले पर मोदी सरकार के प्रदर्शन से खुश नहीं है.

युवाओं के अंदर एक बारूद पनप रहा है. युवा अपने बेहतर भविष्य के लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं और उन्हें कोई माध्यम नहीं मिल रहा है. इसके बाद उन्हें दिखता है कि केंद्र सरकार में 24 लाख सरकारी पद खाली पड़े हुए है. सालों तक भर्ती प्रक्रिया चल रही है लेकिन उनकी ज्वाईनिंग नहीं हो रही है. ऐसे में बेरोज़गार बैठे युवा सरकार के इस खेल को समझ रहे हैं और सरकार की ये विफलता युवाओं को दिख रही है. किसी दिन ये बारूद फुटेगा और मोदी सरकार संभाल नहीं पाएगी.

सवाल: बेरोज़गारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे को लेकर युवा हल्ला बोल की आगे क्या योजना है?

हमारी योजना की केंद्र में देश का सबसे बड़ा मसला बेरोज़गारी है और जो प्रत्यक्ष रूप से देश की सबसे बड़ी आबादी 65 फीसदी युवाओं को प्रभावित कर रही है और अप्रत्यक्ष रुप से पूरे देश को प्रभावित कर रही है. क्योंकि, यदि एक युवा को रोज़गार मिलता है तो उसके पूरे परिवार को रोज़गार मिलता है. जब तक बेरोज़गारी के जड़ को नहीं समझ पाएंगे तब तक इसका समाधान मिलना मुश्किल है. युवा हल्ला बोल सिर्फ समस्या नहीं बताता बल्कि समस्या का समाधान भी बताता है. आने वाले समय में हम बेरोज़गारी से जुड़े पूरे आंकड़े और इस समस्या के समाधान के साथ नज़र आएंगे.

सवाल: दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए युवा हल्ला बोल और स्वराज इंडिया की क्या योजना है?

जवाब: युवा हल्ला बोल की चुनावी राजनीति से कोई मतलब नहीं है. मैं युवा हल्ला बोल का नेतृत्व कर रहा हूं. देशभर के कई प्रदेशों से युवाओं का समूह इस आंदोलन से जुड़ा हैं. अलग-अलग राज्यों से युवा हल्ला बोल के बैनर तले नौजवान मजबूती से एकजूट हो रहे हैं. युवाओं के साथ इस लड़ाई को आगे बढ़ाई जाएगी.

स्वराज इंडिया पार्टी चुनावी राजनीति से जुड़ी है. हम इस बार हरियाणा विधानसभा चुनाव में मजबूती से हस्तक्षेप करने का निर्णय लिया है. हमने बाकी सभी पार्टियों से पहले 10 उम्मीदवारों की सूची भी जारी कर दी है. स्वराज इंडिया हरियाणा के असल मुद्दों को भी मजबूती से उठा रहा हैं. दिल्ली में भी हमारी बहुत अच्छी यूनिट है और आने वाले समय में हम निर्णय लेंगे कि हमें दिल्ली विधानसभा चुनाव में कैसे और किन मुद्दों को लेकर हस्तक्षेप करना है. कुछ वक्त बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर हमारी नीति क्या होगी.

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