कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

अररिया और जहानाबाद की जीत को गोरखपुर और फूलपुर की विजय के साथ देखा जाना चाहिए: मनोज झा

इन नतीजों के आलोक में देश भर में बहुजन एकीकरण का मंथन शुरू हो जाएगा

समकालीन राजनीति में अररिया और जहानाबाद में राजद-नीत गठबंधन की विजय का महत्व समझने से इंकार करने वाले कुछ मुख्यधारा के मीडिया कर्मी और भाजपा-जद (यू) में लोग शुतुरमुर्ग की तरह का व्यवहार कर रहे हैं।ये उपचुनाव उपेक्षितों और वंचित वर्गों के मैंडेट पर भाजपा-आरएसएस और श्रीमान स्व-घोषित “सफेद कमीज कुमार” द्वारा डाले गए डाके के बाद हुई। भाजपा की चुनावी मशीन के पास उपलब्ध अकूत संसाधन और नीतीशजी के प्रशासनिक अमले के खिलाफ राजद के पास सिर्फ अवाम का हौसला और समर्थन था। कुचक्र और षड्यंत्र के आधार पर राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष को कारागार में डालकर, हमारे प्रतिस्पर्धियों ने हमारा मृत्युआलेख लिख दिया था। लेकिन वो इस मुगालते में रहे की व्यक्ति के साथ साथ उनके विचारों को भी क़ैद किया जा सकता है।उन्होंने नीतीश जी का भरोसा कर लिया कि नेता प्रतिपक्ष श्री तेजश्वी यादव अभी ‘बच्चे’ हैं। इन उपचुनावों के नतीजों ने उनकी कार्यशैली और क्षमता के अलावा अवाम के साथ उनके भावात्मक लगाव पर भी मुहर लगा दी है। भाजपा और जद (यू) के पुनः साथ आने के बावजूद हमारी विजय से यह स्पष्ट है कि कागज़ पर अंकगणित से नतीजों को तय करने वाले लोगों को थोड़ा रसायन शास्त्र और अवाम के मनोविज्ञान की समझ होनी चाहिए।

अररिया और जहानाबाद को गोरखपुर और फूलपुर के नतीजों के साथ ही देखे जाने की ज़रुरत है। जिसने साफ तौर पर विपक्ष के छोटे बड़े सभी दलों को एक संकेत दिया है कि लोकोन्मुख और प्रगतिशील राजनीति के हक में सबको एक साथ आना चाहिए।इन नतीजों के पश्चात हिंसा की राजनीति, वैमनस्य की सियासत और समुदायों के बीच ऊंची दीवार खड़ी करने वाली भाजपा और संघ की नीतियों के खिलाफ बहुजन एकीकरण का आगाज़ हो चुका है। बिहार के संदर्भ में एक बार फिर से यह साबित हो गया कि नीतीशजी अब बिहार की राजनीति में सन्दर्भविहीन हो चुके हैं। जद (यू) के विधायक, जो हमारे साथ गठबंधन में पिछला विधानसभा चुनाव जीते थे, उनके बीच हताशा और निराशा का माहौल है। उनके बीच यह चर्चा आम है कि नीतीशजी की मौकापरस्ती के कारण उनकी राजनीतिक ज़मीन खत्म हो रही है।

आने वाले दिनों में इन नतीजों के आलोक में देश भर में बहुजन एकीकरण का मंथन शुरू हो जाएगा और 2019 के लिए एक जनवादी और लोकप्रिय राजनीतिक विकल्प दक्षिणपंथी अधिनायकवाद की राजनीति का खात्मा कर देगा।

(डॉक्टर मनोज झा राष्ट्रीय जनता दल के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और दिल्ली यूनिवर्सिटी के सामाजिक कार्य विभाग में शिक्षक भी। पार्टी ने इन्हें इसी माह बतौर सांसद (राज्य सभा) के लिए चुना है।)

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