कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बजरंगदल के 11 कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी? MP कांग्रेस ने शेयर की पुरानी भ्रामक खबर

ऑल्ट न्यूज़ की पड़ताल.

2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद भी पश्चिम बंगाल में राजनीतिक स्तिथि काफी तनाव पूर्ण बनी हुई है। 12 जून को BBC द्वारा प्रकाशित किये गए लेख के अनुसार पिछले पांच दिनों में हुई हिंसा में कई लोग मारे गए हैं। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक एक भाजपा कार्यकर्त्ता की भी मौत हुई है। इस बीच मध्य प्रदेश कांग्रेस के ऑफिशल ट्विटर हैंडल द्वारा यह दावा किया गया है कि “बीजेपी ने ही करायी थी अपने कार्यकर्ता की हत्या, बजरंग दल के 11 कार्यकर्ता गिरफ्तार..!” इस ट्वीट के साथ, डेलीहंट नामक एक वेबसाइट का लेख भी साझा किया है।

इसी दावे के साथ इस लेख को कई अन्य व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं द्वारा ट्विटर और फेसबुक पर साझा किया गया है। इस लेख को, इंडियन नेशनल कांग्रेस- मध्य प्रदेश के अधिकृत फेसबुक पेज पर भी पोस्ट किया गया है।

पश्चिम बंगाल मे बीजेपी ने ही करायी थी अपने कार्यकर्ता की हत्या, बजरंग दल के 11 कार्यकर्ता गिरफ्तार..!हैरान मत होईये…

Indian National Congress – Madhya Pradesh ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಮಂಗಳವಾರ, ಜೂನ್ 11, 2019

पुरानी भ्रामक खबर

सोशल मीडिया में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के जुर्म में 11 बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का यह दावा 2018 में हुई एक घटना से संबधित है। राजस्थान पत्रिका की वेबसाइट पर भी इससे संबधित लेख 4 जून, 2018 को प्रकशित किया गया था। न्यूज़हंट(डेलीहंट) का साझा किया गया लेख भी 4 जून, 2018 का है। ये खबर ANI ने भी प्रकाशित की थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना लेख हटा दिया था। न्यूज़ लॉन्ड्री की रिपोर्ट के मुताबिक बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की गिरफ़्तारी रामनवमी में हुई हिंसा की घटना से संबधित थी, ना कि भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत से। ANI द्वारा न्यूज़ लॉन्ड्री को बताया गया था कि इस घटना के संबंध में प्रकाशित हुई रिपोर्ट गलत थी और इस वजह से उसे हटा दिया गया था।

इसी घटना से संबधित टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने भी एक लेख प्रकाशित किया था, जिसे बाद में हटा दिया गया था।

इस तरह मध्य प्रदेश कांग्रेस का यह दावा कि भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या के जुर्म में बजरंग दल के 11 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, गलत है। पुरानी और गलत ठहराई गई रिपोर्ट जिसे कई प्रतिष्ठित मीडिया संगठनों ने बाद में हटा दिया था, को हाल में सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है।

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