कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

370 हटाने के बाद मीडिया जश्न मना रही तो दिल्ली स्कूल ऑफ़ जर्नलिज्म के 2 छात्रों ने घाटी पहुंचकर दिखाया सच

ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीते सोमवार को डाउन टाउन में पैलेट गन लगने से एक 15 वर्षीय युवक की मौत हो गई.

जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालातों को लेकर भारतीय मीडिया द्वारा लगातार यह ख़बर सामने आ रही है कि राज्य से धारा 370 हटाए जाने के बाद जन-जीवन सामान्य है. लेकिन इसके बिल्कुल विपरीत घाटी में जीवन अस्त-व्यस्त है. बाजारों में सन्नाटा है और नागरिकों व सेना के बीच मुठभेड़ जारी है.

दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिस्म के 2 छात्रों ने घाटी में जाकर ज़मीनी हकीकत का पता लगाया. उनकी रिपोर्ट के अनुसार धारा 370 हटाए जाने के बाद घाटी में कुछ सही नहीं है. स्कूल-कॉलेज बंद हैं, मेडिकल स्टोर के अलावा अन्य दुकानें बंद हैं. खाने के लिए रोज़मर्रा की चीज़े मिलना लगभग नामुमकिन हो गया है. लेकिन मीडिया में कहीं इस बात का कोई ज़िक्र नहीं है. बल्कि मीडिया घाटी में लगातार सब ठीक होने का दावा कर रही है.

रिपोर्ट के अनुसार कश्मीर के आम नागरिक मीडिया से काफी नाराज हैं क्योंकि मीडिया हकीकत नहीं बता रही है और सब कुछ गलत दिखा रही है.

घाटी में चारों तरफ सन्नाट है, लोगों को घरों में कैद हैं. चारों तरफ केवल सेना की तैनाती है. यहां के लोगों की ज़िंदगी किसी जंग जैसी हो गई है. जम्मू-कश्मीर के हालातों का जायजा लेने पहुंचे इन छात्रों ने पाया कि लोकल इलाकों में न स्कूल खुले नहीं हैं और न ही कोई दफ्तर. जवानों और आम नागिरकों के बीच बीच-बीच में मुठभेठ हो रही है.

ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीते सोमवार (20 अगस्त) को डाउन टाउन में पैलेट गन लगने से एक 15 वर्षीय युवक की मौत हो गई. लेकिन मीडिया में इसका ज़िक्र तक नहीं किया गया.

छात्रों ने दावा किया कि सेना के जवानों ने उनके पास मौजूद मुठभेठ, पत्थरबाजी के विडियो और तस्वीरें डिलीट करवा दीं.

धारा 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर में जश्न के माहौल को लेकर एक आम नागरिक ने कहा, “जो मीडिया में दिखाया जा रहा हालात उससे बिल्कुल विपरीत हैं. पिछले कई दिनों से हम फोन का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. लोकल मार्केट पूरी तरह से बंद पड़ी है. मीडिया द्वारा जो तस्वीरें दिखाई जा रही है वो पुरानी हैं. सरकार द्वारा धारा 370 को हटाए जाने का फैसला कश्मीरियों के ख़िलाफ़ है. क्योंकि वह हमारी पहचान थी.”

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, “सरकार कह रही है कि उन्होंने लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन किया है लेकिन यहां ऐसा कुछ भी नहीं है. रोज यहां कुछ न कुछ नुकसान होता है. रोज लॉ एंड ऑर्डर टूटता है. लेकिन मीडिया बिल्कुल उल्टा  दिखा रहा है. राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय दोनों स्तर पर सच्चाई सामने नहीं आ रही है. आपको इलाकों का मुआयना करने पर पता चलेगा कि सब कुछ बंद पड़ा है. कश्मीरियों को घरों में बंद कर दिया गया है. रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें मुश्किल से मिल पाती है.”

ग़ौरतलब है कि सरकार ने दावा किया था कि सोमवार को घाटी में हालात सामान्य हैं और स्कूल खुले हैं, लेकिन कोई बच्चा स्कूल जाता नहीं दिखाई दिया. लाल चौक से डाउन टाउन तक बाजारों में सन्नाटा पसरा है.

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