कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

BJP के शासन से चिंतित है पूरा देश, चुनाव परिणाम से घबराए हुए हैं PM मोदी- अशोक गहलोत

अशोक गहलोत ने कहा, "लोकतंत्र व संविधान खतरे में है. सारी संस्थाओं की धज्जियां उड़ा रखी है. सब दबाव में काम कर रहे हैं चाहे न्यायपालिका हो, निर्वाचन विभाग हो, प्रवर्तन निदेशालय या सीबीआई."

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 मई को आने वाले चुनाव परिणाम को लेकर घबराए हुए हैं. इसके साथ ही गहलोत ने बेलगाम सोशल मीडिया को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया.

यहां अपने निवास पर संवाददाताओं से बातचीत में गहलोत ने कहा,‘ मोदी खुद घबराए हुए हैं. उन्हें खतरा लग रहा है 23 तारीख का. 23 को क्या होगा? उल्लेखनीय है कि 23 तारीख को लोकसभा चुनाव की मतगणना होगी और परिणाम आने हैं.

गहलोत ने कहा, ‘ जो व्यक्ति बंगाल में यह कहे कि 40 विधायक मेरे संपर्क में हैं. आजादी के बाद कभी आपने किसी प्रधानमंत्री के मुंह से ऐसा सुना कि वह कहे कि एक राज्य में 40 विधायक उसके संपर्क में हैं, 23 तारीख को जैसे ही हम जीतेंगे टूटकर मेरे साथ आ जाएंगे. यह क्या हो रहा है देश के अंदर. बहुत खतरनाक खेल खेला जा रहा है.’

उन्होंने कहा,‘ मोदी के शासन में पूरा देश चिंतित है. आजादी के बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी है कि आम आदमी को लगने लगा है कि लोकतंत्र व संविधान खतरे में है. सारी संस्थाओं की धज्जियां उड़ा रखी हैं चाहे सब दबाव में काम कर रहे हैं चाहे न्यायपालिका हो, निर्वाचन विभाग हो, प्रवर्तन निदेशालय या सीबीआई.’

गहलोत ने कहा,‘ मोदी और उनकी टीम मोदी व अमित शाह दो, दोनों ने इस तरह माहौल बना रखा कि शासन में दो सिर्फ दो लोगों की ही चलती है. सारी संस्थाओं वाले पीएमओ से गाइड होते हैं. पीएमओ से दबाव आते हैं और तमाम संस्थाओं को काम करना पड़ता है.’

गहलोत ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार भी एक तरफा हो रहा है. उन्होंने कहा,‘ ये लोग चुनाव जीतने के लिए साम दाम दंड भेद की नीति अपनाए हुए है. प्रचार एकतरफा हो रहा है. सरकारी मीडिया दूरदर्शन व रेडियो भी प्रचार एकतरफा कर रहे हैं. उच्चतम न्यायालय की सलाह के बावजूद नमो टीवी चल रहा है. निर्वाचन आयोग भी कुछ नहीं कर पा रहा है. तमाम विपक्षी पार्टियां इस बात को लेकर एकमत हैं कि निर्वाचन आयोग ही निष्पक्ष नहीं रहेगा तो उससे क्या उम्मीद की जा सकती है निष्पक्ष चुनाव की.’

गहलोत ने एक बार फिर कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) खुद को राजनीतिक संगठन घोषित कर दे. उन्होंने कहा,‘ आरएसएस खुद को राजनीतिक पार्टी घोषित कर दे तो इसमें हर्ज क्या है? छिपकर वार कर रहे हो आप यह खतरनाक है. आप खुलकर खेलो. भाजपा का खुद के साथ विलय कर दो. आप और भाजपा वैसे ही एक ही हो. मेरा मोहन भागवत को गंभीर सलाह है कि उनको चाहिए कि वह वह मेरे सुझाव पर गंभीरता से विचार करें.’

एक सवाल के जवाब में गहलोत ने सोशल मीडिया देश की आजादी को खत्म करने का षडयंत्र है. उन्होंने कहा, ‘आजादी के 70 साल बाद भी जो जातिवाद समाप्त होना चाहिए था वह बढता गया है. आज नयी पीढी में जातिवाद और ज्यादा घुस गया जो दुर्भाग्यपूर्ण है. नयी पीढी का विज्ञान का तकनीक का जमाना है हाथ मे मोबाइल फोन है दुनिया मुट्ठी में है इसके बावजूद जातिवाद उनमें ज्यादा है.’

गहलोत ने कहा,‘ मोदी, मोदी कहने वाले ज्यादा यूथ ही हैं. कल के भारत का भविष्य उनके हाथों में हैं. अगर वह बिना सोचे समझे सोशल मीडिया के माध्यम से मोदी मोदी करेंगे. सोशल मीडिया देश के लोकतंत्र को खत्म करने का षडयंत्र है. उसके चक्कर में आकर हम कुछ बोलेंगे तो कल हमें पश्चाताप करना पड़ेगा.’

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