कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

राकेश अस्थाना ने पुलिस फंड के 20 करोड़ रुपए भाजपा को चुनाव लड़ने के लिए दिए थे

अस्थाना द्वारा भाजपा के अकाउंट में ट्रांसफ़र किए गए पैसे पुलिस के एकाउंट में वो रुपए सन 2013 से लेकर 2015 तक वापस नहीं आए थे। रिटायर्ड अफसर का आरोप है कि उस समय गुजरात की बागडोर नरेंद्र मोदी के हाथों में थी। उसी समय राकेश अस्थाना ने सूरत के पुलिस कमिश्नर रहते हुए यह घोटाला किया था।

पिछले कई दिनों से चल रहे सीबीआई के दो अफ़सरों के बीच झगड़े में एक नया मोड़ आया है। प्रधान सेवक के खास अफ़सर कहे जाने वाले राकेश अस्थाना को लेकर एक नया खुलासा सामने आया है। कहा जा रहा है कि उन्होंने सूरत में अपनी नौकरी के दौरान राज्य के पुलिस वेलफेयर फंड से 20 करोड़ रुपए भाजपा को चुनावी चंदे के लिए दिए थे।

दैनिक भास्कर की ख़बर के अनुसार सूरत के ही एक रिेटायर्ड पीएसआई ने 23 अक्टूबर को सीबीआई को एक हैरान करने वाला ईमेल भेजा है। ईमेल में लिखा है कि राकेश अस्थाना ने पुलिस के वेलफेयर फंड से 20 करोड़ रुपए भाजपा को चुनावी चंदे के रूप में दिए थे। अस्थाना द्वारा भाजपा के अकाउंट में ट्रांसफ़र किए गए पैसे पुलिस के एकाउंट में वो रुपए सन 2013 से लेकर 2015 तक वापस नहीं आए थे। रिटायर्ड अफ़सर का आरोप है कि उस समय गुजरात की बागडोर नरेंद्र मोदी के हाथों में थी। उसी समय राकेश अस्थाना ने सूरत के पुलिस कमिश्नर रहते हुए यह घोटाला किया था।

रिटायर्ड पीएसआई के मुताबिक उस समय आयकर विभाग ने पुलिस वेलफे़यर के 20 करोड़ के ट्रांसफ़र के मामले में टीडीएस के भुगतान का नोटिस भेजा था। नोटिस भेजने के बाद से ही पुलिस अॉफ़िस से पुलिस वेलफेयर फंड के सारे कागज गुम हो गए थे। जिसकी जानकारी सूरत क्राइम ब्रांच में भी दी गई थी। उसके बाद ऑडिट विभाग की जानकारी में भी यह मामला लाया गया था, लेकिन जल्द ही यह मामला दबा दिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार सूरत के दो आरटीआई कार्यकर्ताओं ने भी RTI के तहत इस मामले के सभी कागजात मांगे थे। लेकिन उन्हें कोई भी जानकारी नहीं दी गई। सूरत शहर के आरटीआई कार्यकर्ता शेख मोहम्मद और सोहेल मोहम्मद अमीन का कहना है कि हमने आरटीआई लगाकर 2015 में पुलिस वेलफ़ेयर फण्ड से संबंधित मामले की जानकारी मांगी थी, लेकिन आज तक हमें कोई जानकारी नहीं दी गई है।

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी के खास अफसर माने जाने वाले राकेश अस्थाना पर सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा द्वारा भ्रष्टाचार के मामले एफआईआर दर्ज करते ही उन्हें पद से हटा दिया गया था। इतना ही नहीं अस्थाना पर भ्रष्टाचार के मामलों में जांच कर रही पूरी टीम का ट्रांसफ़र कर दिया था।

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+