कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

Exclusive: हिन्दुस्तान पेपर कॉरपोरेशन के कर्मचारियों को 2 सालों से नहीं मिली सैलरी, मोदी सरकार के ख़िलाफ़ मानवाधिकार आयोग में लगाई अर्ज़ी

लंबे वक्त से इस परेशानी से जूझ रहे कर्मचारियों में से दो ने जहां आत्महत्या कर ली तो वहीं 49 अन्य की असमय मौत हो चुकी है

असम के नगांव और काछार में ‘हिन्दुस्तान पेपर कॉरपोरेशन’ के अन्तर्गत चलने वाली पेपर मिल में काम करने वाले कर्मचारियों का पिछला दो साल किसी त्रासदी से कम नहीं रहा है. कंपनी ने उन्हें दो साल से कोई पेमेंट नहीं किया है. यहां तक कि उन्हें पीएफ और एलआईसी के पैसे भी नहीं दिए जा रहे हैं. इसे लेकर कंपनी के कर्मचारियों ने बीते 6 फरवरी को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है और मोदी सरकार के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की है. इस पर मानवाधिकार आयोग ने मुख्य श्रम आयुक्त को निर्देश दिया है कि 12 फरवरी तक लिखित रूप से इस पर जवाब दें.

लंबे वक्त से इस परेशानी से जूझ रहे कर्मचारियों में से दो ने जहां आत्महत्या कर ली तो वहीँ 49 अन्य की असमय मौत हो चुकी है.

कर्मचारी संघ के रिवाइवल एक्शन कमेटी के मुख्य संयोजक मनोबेंद्र चक्रवर्ती ने न्यूज़सेंट्रल24X7 से बातचीत में बताया कि अगर इस समय सीमा में श्रम आयुक्त संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते हैं, तो उन्हें मानवाधिकार आयोग के सामने 26 फरवरी को पेश होना पड़ेगा.

मनोबेंद्र चक्रवर्ती का कहना है, “भारत सरकार ने हमारे मेहनत की कमाई से अर्जित किए गए पीएफ़, एलआईसी के पैसे और अन्य बकाये को काटकर एक अपराध किया है. हमारे पीएफ को फरवरी 2015 के बाद से काटा जा रहा है, एलआईसी के पैसे भी काटे गए हैं.” चक्रवर्ती बताते हैं कि सरकार ने बार बार याद दिलाने के बावजूद भी 25 महीने से उन लोगों की सैलरी नहीं दी है. (नगांव पेपर मील के कर्मचारियों की सैलरी 23 महीनों से नहीं दी गई है.)

बता दें कि ये दोनों मिल असम में हैं. इनमें से पंचग्राम का पेपर मिल 20 अक्टूबर 2015 से बंद है तो नगांव पेपर मिल में 13 मार्च 2017 के बाद से ताले पड़े हैं.

कर्मचारियों का कहना है कि अगर देश का मानवाधिकार आयोग उनके मामले को नहीं सुलझाएगा तो वे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग का रूख करेंगे. चक्रवर्ती बताते हैं, “भारत की छवि को नुक़सान ना पहुंचे इस कारण हमने अभी तक संयुक्त राष्ट्र का रूख नहीं किया था. अगर अब भी यह मामला नहीं सुलझता है तो हमारे पास संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा.”

श्रम और रोजगार मंत्रालय की कर्मचारी भविष्य – निधि संस्था (EPFO) ने इस मामले में एक विस्तृत जांच की थी. इस जांच के बाद ईपीएफ़ओ ने 12 सितंबर 2017 को मानवाधिकार आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें जांच अधिकारियों ने माना कि फरवरी 2015 के बाद से ही कर्मचारियों की सैलरी से काटे गए पीएफ का भुगतान नहीं किया गया है. इस रिपोर्ट के आधार पर हिन्दुस्तान पेपर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक पर एफ़आईआर भी दर्ज किया गया है.

(यह ख़बर मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है. मूल ख़बर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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