कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

असम: पेपर मिल के कर्मचारी ने की आत्महत्या, सुसाइड नोट में मोदी सरकार को ठहराया ज़िम्मेदार; जानें वज़ह

असम में स्थित इस मिल को हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन (एचपीसी) द्वारा संचालित किया जाता है.

असम के नागांव में स्थित पेपर मिल में कार्यरत वरिष्ठ इंजीनियर विश्वजीत मजूमदार ने बीते 29 अप्रैल को अपने घर में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली. उन्होंने सुसाइड नोट पर अपनी मौत के लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराया है.

बिश्वजीत मजूमदार ने आर्थिक तंगी की वजह से मौत को गले लगाया है. उन्हें पिछले 28 महीने से अपना वेतन नहीं मिल रहा था. असम में स्थित इस मिल को हिंदुस्तान पेपर कॉरपोरेशन (एचपीसी) द्वारा संचालित किया जाता है, जिसका परिचालन मार्च 2017 में बंद है. मृतक मजूमदार मिल में यूटिलिटी और डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजर के पद पर कार्यरत थे.

मजूमदार ने फ्रिज के दरवाजे पर कथित सुसाइड नोट में लिखा, “मैंने छोड़ दिया. मेरी मौत के लिए भारत सरकार ज़िम्मेदार है.”

मजूमदार कोलकाता के रहने वाले थे. उनके परिवार में पत्नी और दो जुड़वां बेटियां हैं. जिनमें से एक दिल्ली विश्वविद्यालय में एमफिल की पढ़ाई कर रही है. वहीं दूसरी बेटी केरल में एक रिसर्च स्कॉलर है.

द क्विंट से बात करते हुए, उनके परिवार के सदस्यों और सहकर्मियों ने बताया, “वह अपनी बेटी की पढ़ाई के खर्च और अपने स्वास्थय को लेकर बीते कुछ दिनों से परेशान थे.”

मजूमदार के आत्महत्या करने से एक दिन पहले यानी 28 अप्रैल को पंचग्राम में स्थित कछार पेपर मिल में काम करने वाले तकनीशियन पार्थ देब (54 वर्षीय) की मौत हो गई थी. वह लीवर की बीमारी से जूझ रहे थे. रिपोर्ट के अनुसार, कछार पेपर मिल के श्रमिक संघ प्रमुख मनबेंद्र चक्रवर्ती ने बताया, “देब की वित्तीय हालत खराब होने के कारण वह अपना इलाज़ कराने सक्षम नहीं थे.”

ख़बर के अनुसार, 2015 की शुरूआत से ही मजदूरों का वेतन रोक दिया गया था. दोनों मिलों की मजदूर यूनियनों द्वारा बनाई गई अलग-अलग ‘मृतकों की सूची’ में मजूमदार का नाम 35 नंबर पर और पार्थ देब का नाम 20 नंबर पर शामिल था.

द क्विंट  के अनुसार, सूची में दो अन्य आत्महत्या पीड़ितों का नाम भी शामिल था.

चक्रवर्ती ने कहा कि, मृतकों लिस्ट में शामिल लोगों की मौतों का मुख्य कारण आर्थिक संकट है. उन्होंने कहा, “पिछले 28 महीनों से मिल के श्रमिकों को कोई वेतन नहीं मिला है. साथ ही भविष्य निधी, पेंशन और ग्रेच्यूटी भी बंद कर दी गई है.”

नागांव और काछर पेपर मिल केंद्रीय मंत्रालय के अधीन है. 2017 में बिना किसी औपचारिक नोटिस के इसका उत्पादन बंद कर दिया गया था. मिल में काम करने वाले श्रमिकों ने इसे दोबारा शुरू करने के लिए कई बार विरोध प्रदर्शन किया. लेकिन उनकी सारी कोशिश विफल हो गई.

चक्रवर्ती ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “यह बहुत ही दुखद है कि हमने अपने सहयोगियों को अंतराष्ट्रीय श्रमिक दिवस से ठीक पहले बकाया भुगतान नहीं होने की वजह से मृतक पाया.”

उन्होंने कहा, “सरकार ने अब तक कुछ नहीं कहा है. कोई नोटिस नहीं आया है. कर्मचारियों को अपना काम करना है.” साथ ही उन्होंने कहा कि, सरकार ने अब तक कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी से छुटकारा नहीं दिया है. यदि वह हमारी सेवाएं नहीं चाहते तो बकाया राशि की भुगतान के बाद हमें रिलिज कर दें.

बता दें कि मार्च 2017 में मिल बंद होने के बाद से अब तक तीन कर्मचारी आत्महत्या कर चुके हैं.

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