कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

2018 की पहचान मुख्यधारा की मीडिया के प्रति भरोसा खोने वाला साल रहा, पड़ताल

शीर्ष समाचार संगठनों द्वारा भ्रामक सूचनाओं को फैलाया गया और खबरों ने सांप्रदायिक विभाजन को आगे बढ़ाया.