कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मुसलमानों को मोदी सरकार में ‘भ्रम और भय’ के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ, आज एक भाषण से प्रधानमंत्री सर्वधर्मसमभावी हो गए?

कितने आराम से पत्रकार भूल गए कि प्रधानमंत्री ही पहले गुजरात के मुख्यमंत्री थे, जब वहाँ क़त्लेआम हुआ.
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