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बेंगलुरु: निचली अदालत ने किया एमनेस्टी इंडिया के ख़िलाफ़ लगे राजद्रोह के मामले को ख़ारिज

एमनेस्टी इंडिया ने जम्मू कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार हनन के ख़िलाफ़ न्याय मांगते हुए बेंगलुरु में एक मुहीम शुरू की थी, जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का यह मामला अगस्त 2016 में दर्ज हुआ.

बेंगलुरु की एक निचली अदालत ने 8 जनवरी को एमनेस्टी इंटरनेशनल इंडिया के ख़िलाफ़ चल रहे राजद्रोह के मामले को रद्द करने के आदेश दिए हैं. इस संगठन के ख़िलाफ़ अगस्त 2016 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शिकायत दर्ज की थी जिसके आधार पर उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है.

एमनेस्टी इंडिया के कार्यकारी निदेशक आकार पटेल ने इस पूरे मामले को जनता के पैसों और संसाधनों का दुरुपयोग बताते हुए कहा, “राजद्रोह के मामलों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के तहत यह मामला कभी दर्ज ही नहीं होना चाहिए था.” उन्होंने कहा कि यह केस असल मुद्दों से भटकाने का एक तरीका था.

गौरतलब है कि एमनेस्टी इंडिया ने जम्मू कश्मीर में हो रहे मानवाधिकार हनन के ख़िलाफ़ न्याय मांगते हुए बेंगलुरु में एक मुहीम शुरू की थी, जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ राजद्रोह का यह मामला अगस्त 2016 में दर्ज हुआ.

ख़बरों के मुताबिक़ एक प्रदर्शन के दौरान ‘आज़ाद कश्मीर’ के कुछ समर्थकों ने ‘आज़ादी’ के नारे लगाए. राजद्रोह के अलावा पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में उन्होंने एबीवीपी की शिकायत के आधार पर एमनेस्टी इंडिया के ख़िलाफ़ दंगा, विधि विरुद्ध सभा करना और दुश्मनी फ़ैलाने का आरोप भी लगाया.

अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए एमनेस्टी इंडिया के कार्यकारी निदेशक पटेल ने आगे कहा, “हमारा मिशन है भारत में सभी के लिए न्याय, समानता और आज़ादी के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने के लिए लड़ना. हम उन लोगों से नहीं डरेंगे जो हमें चुप करवाना चाहते हैं. हम भारत के आदिम राजद्रोह कानून को हटाने के लिए लड़ते रहेंगे जो कि अब तक मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डराने और उनके ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.”

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