कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी: एसआईटी जांच की मांग मानने से सर्वोच्च न्यायालय का इनकार, चार हफ़्ते तक बढ़ाई हाउस अरेस्ट की अवधि

बीते वर्ष दिसम्बर 31 को पुणे में हुए ‘एल्गार परिषद’ के कार्यक्रम के बाद हुए भीमा कोरेगांव में हिंसा को लेकर हुए एफआईआर के तहत बीते अगस्त 28 को पांच मानवाधिकार कार्यकर्ता - वरवरा राव, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंसाल्वस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को गिरफ़्तार किया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में गिरफ़्तार सामाजिक कार्यकर्ताओं की एसआईटी जांच की मांग खारिज कर दी।

 

शीर्ष अदालत ने पाँचों मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हाउस अरेस्ट के आदेश को चार सप्ताहों के लिए बढ़ा दिया है।

 

इस मामले में फैसला सुना रही खंडपीठ में बहुमत रोमिला थापर एवं अन्य द्वारा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के त्वरित रिहाई की मांग को लेकर दाख़िल किये गए जनहित याचिका से असहमत था। पीठ ने उचित न्यायिक प्रक्रिया के तहत इस मामले में आरोपियों को विधिक उपाय करने के लिए कहा।

 

 

गौरतलब है कि बीते वर्ष दिसम्बर 31 को पुणे में हुए ‘एल्गार परिषद’ के कार्यक्रम के बाद हुए भीमा कोरेगांव में हिंसा को लेकर हुए एफआईआर के तहत बीते अगस्त 28 को पांच मानवाधिकार कार्यकर्ता – वरवरा राव, अरुण फरेरा, वर्नोन गोंसाल्वस, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा को गिरफ़्तार किया था।

 

इसे भी पढ़ें- आपातकाल का नया चेहरा – हिन्दुत्ववादी एकबोटे और भिड़े घूम रहे हैं खुली हवा में और मानवाधिकार कार्यकर्ता जा रहे हैं जेल

सुप्रसिद्ध तेलुगु कवि वरवरा राव को हैदराबाद से गिरफ़्तार किया गया जबकि गोंसाल्वस और फरेरा को महाराष्ट्र से, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ता एवं मानवाधिकार वकील सुधा भरद्वाज को फरीदाबाद से और गौतम नवलखा को दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया। इसके पश्चात सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें हाउस अरेस्ट पर रखने का आदेश दिया था।

 

(पीटीआई इनपुट्स पर आधारित)
You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+