कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नीतीश कुमार के पुराने 10 बयान, जिसमें उन्होंने नरेन्द्र मोदी और RSS की धज्जियां उड़ा दी थी

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने तीन साल पहले आरएसएस मुक्त भारत बनाने की बात कही थी.

पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने संकल्प रैली का आयोजन किया. इस रैली की खास बात यह रही कि पहली बार बिहार में किसी चुनावी रैली में पीएम नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक साथ मंच साझा किया है.

पिछले कुछ सालों में बिहार की राजनीति ने ग़जब की उठा पटक देखी है. एनडीए के पुराने सहयोगी रहे नीतीश कुमार ने 2014 चुनाव से पहले नरेन्द्र मोदी के कारण एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था. इसके बाद 2015 में लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन करके नीतीश कुमार ने जीत हासिल की और सरकार चलाया, लेकिन फिर 2017 में उन्होंने राजद का साथ छोड़ एनडीए का दामन थाम लिया. इससे राष्ट्रीय जनता दल को सरकार से हटकर विपक्ष की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी. 2019 के आम चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी एनडीए का हिस्सा है और नरेन्द्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने की जुगत में लगी है. ऐसे में हम नीतीश कुमार के कुछ बयानों पर नज़र डालेंगे, जिनमें नीतीश कुमार नरेन्द्र मोदी और आरएसएस पर खुल कर हमला बोला करते थे.

1. बीजेपी करती है देश को बांटने की राजनीति

एनडीटीवी के मुताबिक नीतीश कुमार ने 23 अप्रैल 2016 को पटना में जेडीयू की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कहा था कि भाजपा देश को बांटने की राजनीति कर रही है और धर्म के नाम पर लोगों को बांटती है.

2. तिरंगा को राष्ट्रीय ध्वज नहीं मानने वाले तिरंगा यात्रा निकाल रहे हैं

एनडीटीवी की ही एक और ख़बर के अनुसार 24 अगस्त 2016 को एक पुस्तक विमोचन समरोह के दौरान नीतीश कुमार ने भाजपा और आरएसएस को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि हम एक नया दौर देख रहे हैं. कई बार यह सुनकर अच्छा लगता है कि जिन्होंने कभी भी तिरंगे को मान्यता नहीं दी वे आज ‘तिरंगा यात्राएं’ निकाल रहे हैं, जिन्होंने कभी भी तिरंगे को राष्ट्रीय ध्वज नहीं माना, उन्हें ऐसा करते देखकर अच्छा लग रहा है.”

3. गाय के नाम पर भाजपा और संघ देश का माहौल बिगाड़ रहे हैं.

एक ख़बर के अनुसार 7 अगस्त को कानपुर में जेडीयू के कार्यकर्ता सम्मेलन में नीतीश ने कहा था ”संघ और भाजपा एक सिक्के के दो पहलू हैं. भाजपा, संघ का ही एक चेहरा है. जेडीयू कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वह बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के जूते की फोटो ले और उन्हें दिखाकर पूछे कि वह किस चमड़े के जूते पहने हैं. गाय के नाम पर भाजपा और संघ देश का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं.”

4. विकास मॉडल का सपना दिखा रही है भाजपा

आजतक की ख़बर के मुताबिक 23 दिसंबर 2013 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ASSOCHAM में बोलते हुए मोदी पर हमला करते हुए कहा था कि आज कल कोई भी विकास या विकास मॉडल की बात नहीं करता. बस सपना दिखाया जा रहा है कि एक जादू की छड़ी आएगी और सभी समस्या का समाधान हो जाएगा. कुछ ऐसा माहौल बनाया जा रहा है कि हमें पंख लग जाएंगे और हम उड़ने लगेंगे.

5. दलितों व ओबीसी का आरक्षण खत्म करने की कोशिश

23 फरवरी 2016 को एनडीटीवी के अनुसार नीतीश ने कहा था कि केंद्र सरकार की विचारधारा भी आरएसएस वाली है. वे (आरएसएस और बीजेपी) दलितों व पिछड़ों को आरक्षण दिए जाने से नाखुश हैं. इसलिए वे आरक्षण को खत्म करना चाहते हैं.’

6. बीजेपी अध्यक्ष को बीजेपी के नेताओं पर विश्वास नहीं

एनडीटीवी के अनुसार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आरक्षण को लेकर 14 अक्टूबर 2015 को भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत जो कहेंगे, बीजेपी वही करेगी. नीतीश ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा था कि भाजपा अध्यक्ष को बिहार के भाजपा नेताओं पर विश्वास नहीं है, इसलिए वह स्वयं पटना में पिछले कुछ दिनों से लगातार बैठे हुए हैं.

7. आरएसएस बीजेपी के लिए सुप्रीम कोर्ट

एनडीटीवी के अनुसार 23 सितंबर 2015 को आरक्षण पर आधारित एक कार्यक्रम में नीतीश ने कहा था कि संघ देश के संविधान से इतर एक नया संविधान चाहता है. संघ चाहता है कि कुछ लोगों की कमेटी बन जाए और वो इस पर विचार करे कि किन लोगों को और कितने दिन के लिए आरक्षण मिलना चाहिए, जो कि सरासर ग़लत और संविधान के ख़िलाफ़ है. साथ ही उन्‍होंने ताना मारते हुए कहा कि आरएसएस बीजेपी के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरह है.

8. भाजपा की कथनी और करनी में फर्क

एबीपी न्यूज़ के अनुसार नीतीश ने पटना के अडवांटेज कॉन्क्लेव 2016 में कहा था, “आज कश्मीर की स्थिति बिगड़ती चली जा रही है. कश्मीर में दोबारा जो सरकार बनी, सूबे में हाल ख़राब हो गया. इसका जिम्मेदार कौन है. बीजेपी के कहने और करने में बड़ा फर्क है.”

9. मोदी को दी थी नसीहत- कभी टोपी पहननी पड़ेगी, कभी तिलक लगाना पड़ेगा

वन इंडिया के मुताबिक 6 अगस्त 2013 को नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यकों के राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए कहा था कि भारत जैसे देश को आगे ले जाने के लिए सबको साथ लेकर चलना होगा, कभी टोपी भी पहननी पड़ेगी, कभी तिलक भी लगाना पड़ेगा. नीतीश कुमार का यह बयान नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ था, क्योंकि नरेन्द्र मोदी ने 2011 में एक कार्यक्रम के दौरान टोपी पहनने से इनकार कर दिया था.

10. जब नीतीश ने कही थी संघ मुक्त भारत बनाने की बात

नीतीश कुमार ने 17 अप्रैल 2016 को कहा था कि भारत को संघ मुक्त देश बनाने के लिए देश की हर विपक्षी पार्टी को हाथ मिलाना होगा. लल्लनटॉप की ख़बर के मुताबिक नीतीश ने कहा था कि आज वह दौर है जब सबको मिलकर गैर-संघवाद करना होगा. इसके लिए सबको एकजुट होना होगा. संघ-मुक्त भारत बनाने के लिए सभी गैर-बीजेपी पार्टियों को एक होना होगा.

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