कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ग्राउंड रिपोर्ट: डिजिटल इंडिया ले डूबेगा बिहार के किसानों का फ़सल, बीज ना मिलने से परेशान हजारों किसान

किसानों का कहना है कि जिला से लेकर राज्य स्तर के अधिकारी जमाखोरी की नियत से बीज नहीं दे रहे हैं.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार की नक़ल के चक्कर में प्रदेश के किसानों का एक पूरा सीजन लेकर डूबने वाले हैं. किसानों को भय है कि सीजन बीत जाएगा, लेकिन वे सरकारी बीज को नहीं पा सकेंगे क्योंकि सरकार ने बीज पाने के लिए नया झमेला लगा दिया है. दरअसल, बिहार में सब्सिडी पर मिलने वाले बीज वितरण का पूरा काम डिजिटल कर दिया गया है. अब किसान को बीज के लिए मोबाइल पर आने वाला ओटीपी दिखाना पड़ता है. जबकि भारी संख्या में शिकायत आ रही है कि किसानों के मोबाइल पर ओटीपी आ ही नहीं रहा. इधर किसान परेशान हैं कि गेहूँ बुआई का समय बीत रहा है और बीज नहीं मिल रहा.

पूर्वी चंपारण जिले के पताही प्रखंड के विजय सिंह बताते हैं कि एक महीने पहले हमने गेहूँ का बीज पाने के लिए रजिस्ट्रेशन किया था. लेकिन, आज तक ओटीपी नहीं आया जिसकी वजह से हमें बीज नहीं मिल रहा. विजय सिंह बताते हैं कि कुछ ही दिनों में मंसूर और गेहूँ की बुआई का सीजन बीत जाएगा. इसके बाद हमें बीज मिलने का ही क्या लाभ होगा. 

दरअसल, बिहार सरकार ने किसानों को दिए जाने वाले बीज का पूरा सिस्टम इसी साल 2019 से डिजिटल किया है. पिछले साल तक किसानों को बीज लेने के लिए एक साधारण सा रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरना पड़ता था. इस फॉर्म को भरने के बाद प्रखंड कृषि पदाधिकारी किसानों को बीज वितरित करते थे. इससे समय पर बीज उपलब्ध हो जाते थे. लेकिन, इस बार से पूरा सिस्टम बदल गया है.

पताही प्रखंड के बाराशंकर निवासी विनोद कुमार बताते हैं कि बीज वितरण का काम ऑनलाइन करके सरकार ने भ्रष्टाचार बढ़ाने का काम किया है. उनके मुताबिक तकनीकी समस्याओं का हवाला देकर किसानों के मोबाइल पर ओटीपी नहीं भेजा जा रहा है. जिला और राज्य स्तर के अधिकारी ऐसा करके बीजों की जमाखोरी कर रहे हैं, समय बीत जाने के बाद इन्हीं बीजों को बेचकर पैसे उगाए जाएंगे.

फ़ोटो: अभिनव प्रकाश

सब्सिडी मिलने का यह है सिस्टम

सब्सिडी पाने के लिए किसान को सबसे पहले बिहार सरकार के कृषि विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है. इसके बाद रजिस्टर्ड किसान बीज के लिए अप्लाई करते हैं. फिर उनके मोबाइल पर सरकार की ओर से ओटीपी भेजा जाता है. यह ओटीपी लेकर सरकारी बीज वितरण दुकान पर जाने पर बीज मिलती है. अलग-अलग श्रेणी के बीज के लिए सब्सिडी की अलग-अलग व्यवस्था है. गेहूंँ पर 50 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत की सब्सिडी की व्यवस्था है.

दुकानदारों को भी हो रहा नुक़सान

पूर्वी चंपारण जिले के बखरी बाजार पर बीज का सरकारी दुकान चलाने वाले रामकिशोर कुमार बताते हैं कि बीज वितरण का काम ऑनलाइन होने की वजह से उन्हें बहुत नुक़सान हो रहा है. पिछले साल तक एक सीजन में वे बीज बेचकर कम से कम 50,000 रुपए तक का मुनाफा कमा लेते थे. लेकिन, ओटीपी ना आने की वजह से बीज की बिक्री नहीं हो रही है और इस बार पूंजी फंस गई है. उनका कहना है कि पिछले एक महीने में उनके यहां से मात्र 10 किसान ही बीज लेकर गए हैं. वे बताते हैं कि अगली बार से इस बिजनेस को ठप करना पड़ेगा. 

किसान लगा रहे भ्रष्टाचार का आरोप

हालांकि कई किसानों का कहना है कि सब्सिडी पर मिलने वाले बीज में भी दुकानदार घपला कर रहे हैं. जरदाहां पदुमकेर निवासी रंजीत पासवान बताते हैं कि बीज वितरक के पास जाने पर वह सब्सिडी वाले बीज का आधा हिस्सा अपने पास रखकर आधा हिस्सा ही किसानों को दे रहा है. इससे किसानों को कोई लाभ नहीं हो रहा.

बीज वितरण में और भी कई खामियां

किसानों का कहना है कि सरकार जरूरत से काफी कम बीज दे रही है. हर किसान को मात्र 40 किलो गेहूँ का बीज दिया जा रहा है, जिसमें एक एकड़ खेती हो पाती है. वही मंसूर का बीज एक पंचायत में लगभग दो किसानों को ही दिया जा रहा है. इससे बाकी किसान महंगे दामों में बाजार से बीज खरीद रहे हैं. बाजार में इसकी कीमत काफी ज्यादा है.

प्रशासन के दावे संदेहास्पद

किसानों की समस्या पर पताही प्रखंड के कृषि पदाधिकारी विजय कुमार का कहना है कि ओटीपी आने में अभी समस्या हो रही है, लेकिन उसे जल्द से जल्द ठीक किया जाएगा. न्यूज़सेंट्रल24X7 से बातचीत में उन्होंने बताया कि जिला से लेकर राज्य स्तर के अधिकारी इस मामले में बहुत गंभीर हैं. हालांकि उन्होंने दावा किया कि दो दिन पहले ही बीज वितरण का काम शुरू हुआ है. इसलिए यह शुरुआती दौर है, आगे सब ठीक हो जाएगा. किसानों से बात करने पर कृषि पदाधिकारी की बात ग़लत साबित होती है. किसानों का कहना है कि बीज वितरण की प्रक्रिया लगभग एक महीने पहले शुरू हुई है और इस प्रखंड में एक महीने में बमुश्किल 20 से 25 लोगों को ही सब्सिडी वाला बीज मिल सका है.

नाम ना छापने की शर्त पर मोतिहारी प्रखंड के एक कृषि समन्वयक बताते हैं कि राज्य में कई जगह पर ओटीपी के कारण बीज मिलने में समस्या आ रही है. हालांकि जिला मुख्यालयों में स्थिति ठीक है. मोतिहारी प्रखंड में अभी लगभगग 300 किसानों ने बीज उठाने का काम किया है. यहां अभी तक तीन-चार लोग ही ओटीपी ना आने की समस्या लेकर आए हैं. सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि किसानों को बीज देने के लिए ऑनलाइन के साथ-साथ एक ऑफलाइन वैकल्पिक व्यवस्था की भी जरूरत है. उनके मुताबिक राज्य में हजारों किसान अभी ओटीपी ना आने की वजह से सब्सिडी वाला बीज नहीं उठा पाए हैं.

न्यूज़सेंट्रल24×7 ने इस बाबत पूर्वी चंपारण के जिला कृषि पदाधिकारी ओंकार नाथ सिंह से मुलाकात की कोशिश की. वे कार्यालय में अनुपस्थित थे. वहां मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि 4 दिसंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दौरा है, डीएओ साहब उसी में व्यस्त हैं.

(अभिनव प्रकाश कारवां मीडिया टीम से जुड़े हैं. यह संस्था सांप्रदायिक हिंसा और घृणित अपराध के मामलों को रोकने की दिशा में काम करती है.)

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