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पलायन के दर्द से बिहार में कराह रहा लोकतंत्र, पुरुष मतदाताओं की संख्या लगातार हो रही कम

बिहार में रोज़गार, स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा के अभाव के कारण लोग लगातार पलायन कर रहे हैं.

लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार से निराशाजनक तस्वीर सामने आई है. जहां चार चरणों के मतदान में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम और यूपी की तुलना मे सबसे कम वोट पड़े हैं. मतदान के दौरान पोलिंग बूथों पर महिलाओं की तुलना में पुरुषों मतदाताओं की संख्या काफी कम आंकी गई है.

सुशासन बाबू के राज में बिहार में कम वोट पड़ने का एक प्रमुख कारण पलायन है. कम पढ़े-लिखे युवाओं से लेकर शिक्षित वर्ग राज्य से पलायन कर रहा है.

बिहार में पहले चरण में 53.06 प्रतिशत, दूसरे चरण में 62.53 प्रतिशत और तीसरे चरण में 60 प्रतिशत ही वोट पड़े हैं. जबकि पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 81, दूसरे में 75.27 और तीसरे चरण में 79 प्रतिशत मतदान हुआ है. इसी तरह महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ में भी बिहार की तुलना में अधिक वोट पड़े हैं.

प्रभात ख़बर की रिपोर्ट के अनुसार पढ़ाई, नौकरी, बिजनेस और जन्म के बाद दूसरे राज्यों में रहने वाले लोगों की संख्या भी लाखों में है. ये लोग सिर्फ त्योहारों पर ही अपने राज्य आते हैं. ऐसे में इसका असर भी चुनाव के दौरान वोटिंग प्रतिशत पर पड़ता है.

14 साल से नीतीश सरकार के कार्यकाल में उद्योग-धंधे कम होने से की वजह से लोगों को रोज़गार नहीं मिल रहा है. स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षा का भी बुरा हाल है. जिसकी वजह से लोग पलायन कर रहे हैं.

राज्य सरकार के आंकड़ें के अनुसार अधिकतर ज़िलों में रोज़गार व खेती का स्रोत कम है. साल 1995 के बाद बिहार से लगातार पलायन हो रहा है. 2011 की जनगणना की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार से 44 लाख लोग दूसरे राज्यों में पलायन कर चुके हैं.

बिहार आर्थिक अध्ययन संस्थान की शोध रिपोर्ट के अनुसार पलायन करने वालों में अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी जातियों की संख्या सबसे ज्यादा है. वहीं 12 फीसदी सवर्ण भी अन्य राज्यों में जा चुके हैं.

सामाजिक अध्ययन संस्थान के पूर्व निदेशक डॉ डीएम दिवाकर ने कहा, “बिहार से पलायन तो लगातार जारी है. इसका असर वोट प्रतिशत पर भी पड़ा है. गांवों में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में कम है. इसलिए महिलाओं की लंबी कतार दिखाई देती है. अगर दीवाली और छठ के समय चुनाव हो तो बिहार में भी वोट का प्रतिशत बढ़ जायेगा.”

बता दें कि बिहार में जनसंख्या का घनत्व अधिक है. लेकिन देश के अन्य राज्यों की तुलना में यहां प्रति व्यक्ति आय चार गुना कम है.

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