कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बिहार: असफल साबित हो रही है प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, केवल 39 प्रतिशत को मिला काम

70 प्रतिशत कौशल विकास योजना केंद्र बंद हो चुके हैं, जबकि 2020 तक 89,664 युवाओं को हुनर सीखाने का था लक्ष्य।

2014 से पूर्व अपने चुनावी प्रचार में प्रधानमंत्री मोदी के कई वादों में से एक था युवकों को रोज़गार के साधन देना और देश की बढ़ती बेरोज़गारी को रोकना। इसी क्रम में उन्होंने 2015 में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना शुरू की थी। उनका दावा था कि इस योजना के तहत युवाओं को विभिन्न प्रकार की तकनीकी प्रशिक्षण दी जायेगी ताकि जिससे उन्हें रोज़गार के बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।

लेकिन मोदी जी के प्रिय सुशासन बाबु के राज में मामला कुछ और ही नज़र आ रहा है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत बिहार में 1.15 लाख युवाओं ने हुनर सीखने के लिए केंद्रों में दाख़िले लिया था। इन युवाओं में केवल 39 प्रतिशत यानी 34,000 को ही काम मिल पाया। नियम के अनुसार कौशल विकास के किसी भी केंद्र पर प्रशिक्षण पाने वाले 70 प्रतिशत युवाओं को काम दिलवाने के बाद ही केंद्र को पूरा भुगतान मिलेगा और दूसरा बैच शुरु किया जाएगा। अब तक गिनती के कुछ ही कौशल केंद्र इस लक्ष्य व नियम को पूरा कर पाए हैं।

लक्ष्य हासिल न कर पाने वाले 70 प्रतिशत केंद्र अब बंद हो चुके हैं। इस मामले से जुड़ा एक हिस्सा यह भी है कि युवा वर्तमान समय में आसमान छूती महंगाई और बढ़ते हुए जीवन स्तर के साथ अपना तालमेल बैठाने की चिंता में कम वेतन वाली नौकरी नहीं करना चाहते जिसकी वजह से प्लेसमेंट के एक-दो महीने में ही वे काम छोड़कर जाने लगे हैं।

कमाल की बात यह है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के स्टेट कंपोनेंट की स्थिति ऐसी है कि वह अभी तक ठीक से शुरु नहीं हुआ है। अब तक केवल तीन कौशल केंद्र ही काम शुरु कर पाए हैं जबकि इस योजना का लक्ष्य 2016-20 के बीच 89,664 युवाओं को हुनर सीखाना हैं।

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