कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

हमारे गांव में भी एक स्कूल हो ताकि हम हिंदी बोल सकें: भारत के ये बच्चे नेपाल में पढ़ने को हैं मजबूर, देखें विडियो

बच्चों को गांधी नेहरू के बारे में नहीं मालूम...लेकिन नेपाल के शख़्सियत का है ज्ञान: क्योंकि हम नेपाल में पढ़ते हैं.

केन्द्र की मोदी सरकार और बिहार में सुशासन बाबू की सरकार विकास को लेकर भले ही बड़े-बड़े दावे करते हों लेकिन इसकी ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही है. बिहार के किशनगंज में एक ऐसा भी गांव है जहां स्कूल नहीं होने के वज़ह से बच्चे पड़ोसी देश नेपाल में पढ़ने जाते हैं.

वे नेपाल के स्कूलों में उस देश के ही इतिहास, भूगोल और राजनीति का ज्ञान लेते हैं. नेपाल का राष्ट्रगान गाते हैं. उन्हें भारत के राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का कुछ पता नहीं है. न ही वो गांधी को जानते हैं और न नेहरू को. लेकिन उन्हें नेपाल के पहले प्रधानमंत्री से लेकर अब तक के प्रधानमंत्रियों के नाम याद हैं. बच्चों की मांग है कि उनके गांव में स्कूल खोला जाए ताकि वो भारत के विषय में पढ़ सकें. हिंदी बोल सकें.

भारत-नेपाल बोर्डर पर स्थित ठाकुरगंज प्रखंड का पाठांवारी गांव आज़ादी के इतने दशक बाद भी एक बुनियादी सुविधाओं से महरूम है. गांव में न बिजली है और न स्कूल. गांव वालों का कहना है कि मोदी सरकार के आने के बाद स्कूल बनाने को लेकर हमने ज़मीन दान भी किया लेकिन आगे कोई कार्रवाई नहीं. मजबूरन बच्चों को नेपाल के स्कूलों में पढ़ना पड़ता है.

‘मैं मीडिया’  नामक एक यूट्यूब वेबसाइट ने गांव के बच्चों से इस संदर्भ में बात की. शाहनवाज़ आलम जो नेपाल के ‘श्री विद्यालय’ स्कूल के छठी कक्षा में पढ़ता है , बताता है कि, ” स्कूल में नेपाली पढ़ाया जाता है. हम इंडिया के है, हम नेपाली क्यों पढ़ेंगे. हमें गांव में ही स्कूल चाहिए.”

भारत के बच्चे सीख रहे हैं नेपाल से देशभक्ति, प्रधानमंत्री को पता है क्या?

भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बिहार के इस गाँव में स्कूल नहीं है, बच्चे नेपाल के स्कूल में पढ़ रहे हैं और नेपाल से देशभक्ति सीख रहे हैं। उनके जुबान पर नेपाल का राष्ट्रगान है, जन गण मन, वन्दे मातरम् कभी सुना नहीं; महात्मा गांधी, नेहरू को नहीं जानते, लेकिन पुष्पकमल दाहाल से वाकिफ़ हैं। विकास तुम कहाँ हो?

Main Media/मैं मीडिया ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಸೋಮವಾರ, ಏಪ್ರಿಲ್ 22, 2019

वो आगे कहता है कि, “हमें आगे हर जगह हिंदी बोलना होगा लेकिन हम नेपाली स्कूल में पढ़ते हैं. फिर कैसे हिंदी सीखेंगे वहां तो नेपाली ही सिखाई जाएगी.”

बच्चे एक सुर में नेपाली राष्ट्रगान सुना देते हैं. जबकि उन्हें भारत के राष्ट्रगान के बारे में नहीं मालूम. वो नेपाल के स्कूल में सुबह के प्रार्थना में नेपाली राष्ट्रगान ही गाते हैं.

बच्चों को गांधी नेहरू किसी के बारे में नहीं मालूम. जबकि नेपाल के पुष्पकमल दाहाल से वाकिफ़ हैं. शहनवाज़ कहता है कि “हम बचपन से नेपाली ही सुनते पढ़ते आ रहे हैं. हम कैसे वंदे मातरम बोल लेंगे. स्कूल में वहां बंदे मातरम नहीं होता. हमें गांव  में अपना एक स्कूल चाहिए. नेपाल के बच्चे बोलते हैं कि तुम अपने इंडिया में पढ़ो क्यों नेपाल आ जाते हो.”

मोहम्मद गोलहवार जो किसी प्रकार अपनी जीविका चलाते हैं, लेकिन गांव के बच्चे पढ़ लिख जाए इसके लिए उन्होंने अपने तीन कट्ठे ज़मीन स्कूल बनाने के लिए दान कर दी. लेकिन दान किए ज़मीन के तीन-चार साल हो गए स्कूल अब तक नहीं बन पाया. वो कहते हैं, “गांव में किसी चीज़ की सुविधा नहीं. न बिजली है और न स्कूल. मैंने तीन कट्ठे जमीन सरकार को दी लेकिन लोग देखकर चले गए आगे की कार्रवाई नहीं हुई.”

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