कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बिहार भाजपा ने 2009 की पुरानी तस्वीर के जरिए दिखाया मोदी सरकार का विकास कार्य

बिहार भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने राज्य सरकार द्वारा पिछले 5 साल में हासिल आधारभूत संरचनात्मक विकास को दिखलाने के लिए कथित रूप से एक सड़क-विस्तार की पहले और बाद की तस्वीरें शेयर की.

बिहार भाजपा के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने राज्य सरकार द्वारा पिछले 5 साल में हासिल आधारभूत संरचनात्मक विकास को दिखलाने के लिए कथित रूप से एक सड़क-विस्तार की पहले और बाद की तस्वीरें शेयर की. इसमें ऊपर की तस्वीर में गड्ढों वाली सड़क थी जबकि नीचे वाली तस्वीर में नई बनी सड़क थी जिसके बारे में भाजपा ने दावा किया कि यह दूरस्थ गांवों में है. पार्टी ने इन तस्वीरों को #5YearChallenge के साथ ट्वीट किया. तस्वीरों का कैप्शन दिया गया था — “देखिए पाँच सालों में क्या बदला! तब: अच्छी सड़कें महानगरों तक ही सीमित थी. अब: सुदूर गाँवों में भी सड़कों का निर्माण हो रहा है. #RiseOfNewIndia”

बिहार भाजपा ने इन तस्वीरों को अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी पोस्ट किया. वही संदेश राज्य के कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार द्वारा भी फैलाया गया.

सच क्या है?

इन तस्वीरों की रिवर्स सर्च करने पर ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ऊपर वाली तस्वीर को बैंगलोर के एक सड़क की है. डेक्कन हेराल्ड ने इस तस्वीर के साथ साल 2016 में खबर की थी और तस्वीर के लिए फोटोग्राफर सतीश बी को श्रेय भी दिया था.

हालांकि, नीचे वाली तस्वीर का सही स्थान जानने में हम असमर्थ रहे, लेकिन यह पता चला कि यह इंटरनेट पर कम से कम 2009 से उपलब्ध है. इसे टीम-बीएचपी नामक वेबसाइट द्वारा पोस्ट किया गया था और “थिरुमंगलम और विरुधुनगर (NH7) के बीच के विस्तार को चार लेन किया गया” के रूप में वर्णित किया गया था.

2013 में द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा एक रिपोर्ट में उपयोग किए जाने समेत, इतने वर्षों में कई दूसरी वेबसाइटों ने इस तस्वीर का इस्तेमाल किया था.

यदि यह तस्वीर 10 साल पहले ऑनलाइन उपलब्ध थी, तो यह पिछले वर्ष नई बनी सड़क का चित्रण नहीं कर सकती. बिहार भाजपा का दावा — कि यह सड़क राज्य के दूरस्थ क्षेत्र में 2018 में बनाई गई — तथ्यों की छानबीन में सही नहीं उतरता है.

#10YearChallenge में इंटरनेट की भागीदारी के साथ, भाजपा अपने #5YearChallenge से अपने काम का प्रदर्शन करने का प्रयास कर रही है. लेकिन यह पार्टी भ्रामक तस्वीरों का इस्तेमाल करके उन्हें अपने शासन के तहत पूरी हुई आधारभूत संरचनात्मक परियोजनाएं दिखलाते हुए पाई गई. इससे पहले, ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि आगरा-लखनऊ और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की तस्वीरों का, पश्चिमी पेरीफेरल एक्सप्रेसवे के रूप में, भारतीय जनता पार्टी के कम से कम 20 हैंडल्स द्वारा इस्तेमाल किया गया था.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+