कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

बीजेपी शासित राज्यों में खनन माफिया का बोलबाला, कार्रवाई करने के बजाय सरकारों ने चुप्पी साधी

छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में अवैध खनन के कुल 94,180 मामले लेकिन बस 3,102 मामले में ही एफआइआर दर्ज

देश में खनन माफियों का बेलगाम लूट जारी है। सुप्रीम कोर्ट के फटकार के बाद भी ये अवैध खनन का कारोबार रूकने का नाम नहीं ले रहा है। अलग-अलग राज्यों की सरकारें इस पर कार्रवाई करने के बजाय चुप्पी साधी हुई हैं।

हिन्द किसान इस संबंध में केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में जारी किए गए आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। राज्यसभा में खनन और कोयला मंत्री हरिभाई पार्थिभाई चौधरी ने एक सवाल के जवाब में जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में अवैध खनन का काफी बोलबाला है। लेकिन कार्रवाई करने के संदर्भ में ये तीनों बीजेपी शासित राज्य फिसड्डी हैं।

आंकड़ों के अनुसार 2013-14 से 2017-18 के दौरान तीनों राज्यों में मिलाकर अवैध खनन के कुल 94,180 मामले सामने आए लेकिन इनमें से 3,102 मामले में ही एफआइआर दर्ज हो पाए।

आंकड़ों को विस्तार से देखने पर रमन सरकार कार्रवाई के मामले में सबसे फिसड्डी दिखती है। छत्तीसगढ़ में अवैध खनन के कुल 23,030 मामलों में महज़ दो मामलों में ही एफआइआर दर्ज की गई। इसके बाद मध्यप्रदेश में सबसे ज़्यादा 54,024 मामले सामने आए जिसमें से 516 मामलों में एफआइआर दर्ज की गई। राजस्थान में 17,126 मामलों में से 2584 मामलों में एफआइआर दर्ज की गई।

पिछले चार सालों में इतने मामलों में नाममात्र की कार्रवाई हो पाई है। केंद्र सरकार ने खनन को राज्य का विषय बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया लेकिन इन तीनों राज्यों में शासन करने वाली बीजेपी सरकार फिलहाल इस पर कुछ भी कहने से बच रही है।

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