कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

लोकसभा चुनाव में भाजपा की चाल- व्हाट्सएप ग्रुपों के जरिए फ़ेक न्यूज़ भेज कर वोटरों को प्रभावित करने का प्लान

भाजपा सरकार सत्ता में वापसी के लिए हर मतदाता केंद्र के लिए 3 व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की तैयारी कर रही है.

व्हाट्सएप ने नकली ख़बरों पर रोक लगाने के लिए अधिकतम पांच व्हाट्सएप समूहों में संदेश भेजने की अनुमति दी है लेकिन,मोदी सरकार आगामी लोकसभा चुनाव को भारत का पहला व्हाट्सएप चुनाव बनाने की तैयारी कर रही है. जिसका मतलब यह है कि आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक संदेश और मीम्स फैलाने के लिए हज़ारों व्हाट्सएप ग्रुप का उपयोग किया जाएगा.

टाइम की ख़बर के अनुसार भाजपा देश के 9,27,533 मतदान केंद्रों के लिए हर एक बूथ पर तीन व्हाट्सएप ग्रुप बनाने की नीति पर काम कर रही है. व्हाट्सएप ग्रुप में अधिकतम 256 सदस्य होते हैं ऐसे में भारत की 1.3 अरब आबादी में से 700 मिलियन लोगों तक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए मैसेज पहुंचाए जा सकते हैं. ग़ौरतलब है कि 2014 के लोकसभा चुनावों के समय भारत में केवल 21 प्रतिशत लोगों के पास स्मार्टफोन मौजूद था. लेकिन साल 2019 तक यह आंकड़ा लगभग 39 प्रतिशत हो गया है. स्मार्टफोन उपयोग करने वाले 90 प्रतिशत से अधिक लोग व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं. वहीं इन बातों पर ध्यान देते हुए भाजपा के सोशल मीडिया प्रमुख ने 2019 के चुनावों को भारत का पहला व्हाट्सएप चुनाव घोषित किया है.

शोधकर्ताओं के अनुसार व्हाट्सएप ग्रुप में अक्सर गलत जानकारी और घृणा वाली बयानबाजी होती है. जिसमें ज्यादातर फॉर्वड मैसेज होते हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा सरकार इस प्रवृत्ति को हवा देने का काम करती है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की एक साथी सोमा बसु जो भारत में व्हाट्सएप ग्रुप पर नफरत भरे संदेशों के प्रसार पर शोध कर रही हैं, उनका कहना है कि स्वयंसेवकों की एक सेना सिर्फ झूठे संदेशों को व्हाट्सएप के जरिए फैलाती है. उन्होंने आगे बताया कि स्वयंसेवक एक बार में 20 लोगों को संदेश भेजने में सक्षम नहीं होते हैं, इसलिए वे इसे पांच ग्रुप में मैसेज भेजने का काम करेंगे.

टाइम ने भाजपा के एक पूर्व कर्मचारी से बातचीत की है.  25 वर्षीय शिवम शंकर सिंह ने अगस्त 2016 से अप्रैल 2018 के बीच भाजपा के लिए डेटा विश्लेषक का काम किया था. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने मतदाताओं को सामाजिक व आर्थिक स्थिति के आधार पर अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुप चैट में जोड़ने के लिए व्यक्तिगत डेटा इकट्ठा किया है. (वह भाजपा पर किसी गैरकानूनी गतिविधि का आरोप नहीं लगाते हैं.)

अप्रैल 2018 में, शिवम शंकर सिंह ने इस्तीफ़ा दे दिया था. वह कहते हैं कि उन्होंने महसूस किया कि घृणित बयानबाजी 2019 में भाजपा की चुनावी योजना का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन रही है. लेकिन, उन्होंने राज्य के चुनावों में पार्टी की व्हाट्सएप रणनीति को पहले ही देख लिया था. इनमें उत्तर प्रदेश के 2017 के चुनाव शामिल थे.

उत्तरप्रदेश के चुनावों के बारे में सिंह ने बताया कि व्हाट्सएप ग्रुप जाति के आधार पर बनाए गए थे. भाजपा एक विशिष्ट जाति समूह को एक विशिष्ट संदेश भेजने की अनुमति देती है. उस चुनाव में  भाजपा 26 प्रतिशत से अधिक वोट स्विंग के साथ सत्ता में आई थी. हालांकि भाजपा के एक प्रवक्ता ने टाइम को बताया कि इस तरह का कोई आधिकारिक समूह (जाति के आधार पर नहीं) बनाया गया था.

ग़ौरतलब है कि भाजपा व्हाट्सएप ग्रुप चैट का उपयोग करने वाली एकमात्र पार्टी नहीं है, लेकिन अन्य पार्टियों के मुकाबले भाजपा व्हाट्सएप ग्रुप चैट का उपयोग ज्यादा करती है. टाइम  विश्लेषण के अनुसार  कई व्हाट्सएप समूहों में गलत सूचनाओं को व्यापक स्तर पर साझा किया जाता है. कई भाजपा समर्थक व्हाट्सएप ग्रुपों के संदेशों में अयोध्या में ध्वस्त मस्जिद की जगह पर एक हिंदू मंदिर बनाने के सपने को बढ़ावा दिया गया है.

टाइम  द्वारा देखे गए भाजपा के एक ग्रुप के संदेश में, “वोट फॉर मोदी” नामक एक ग्राफिक इमेज में एक मंदिर के बाहर एक आदमी का शव लटका हुआ है. साथ में संदेश लिखा है कि “एक और पुजारी की हत्या कर दी गई है, “याद रखो, जिहादियों का बस यही नहीं रुकने वाला है.”

ग़ौरतलब है कि व्हाट्सएप के लिए सिर्फ गलत सूचनाओं को रोकना एक बड़ी चुनौती है. जिसका उपयोग राजनीति में सत्ता प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है. व्यापक स्तर पर गलत सूचनाओं का आदान-प्रदान हिंसा व लोगों को भ्रामक ख़बरें पहुंचाने का काम करता है. हालांकि, जुलाई 2018 में व्हाट्सएप ने गलत सूचनाओं के प्रसार को रोकने के लिए मैसेज फॉर्वड करने के लिए ग्रुपों की सीमा केवल 5 तक सीमित कर दी थी.

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