कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सबरीमला का मुद्दा भाजपा के लिए मनुवादी विचारधारा थोपने का सांप्रदायिक राजनीतिक एजेंडा है- बृंदा करात

भाजपा और दक्षिणपंथी संगठन सबरीमला मुद्दे का लाभ उठा कर राज्य में बढ़त बनाने की कोशिश कर रहे हैं.

माकपा नेता बृंदा करात ने आरोप लगाया है कि आरएसएस ‘‘काली शक्तियों’ का नेतृत्व कर रहा है और अब केरल में उसके साथ विचारों की लड़ाई है क्योंकि यह दक्षिणपंथी संगठन सबरीमला मुद्दे का लाभ उठा कर राज्य में बढ़त बनाने की कोशिश कर रहा है.

पीटीआई को दिए एक विशेष साक्षात्कार में करात ने दावा किया कि भगवान अयप्पा मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति का मुद्दा धार्मिक नहीं बल्कि भाजपा के लिए राजनीतिक है.

बीते 28 सितम्बर को उच्चतम न्यायालय ने इस मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दे दी थी. राज्य की एलडीएफ सरकार ने इस फैसले को लागू करने का फैसला किया जिसका व्यापक विरोध हो रहा है.

भाजपा का कहना है कि सबरीमला मंदिर की परंपराएं लोगों के दिल के करीब हैं और वह राज्य में सत्तारूढ़ वाम मोर्चे की सरकार को लोगों का विश्वास तोड़ने नहीं देगी.

अदालत के फैसले को लेकर एक पुनर्विचार याचिका भी दायर की गई और इसकी सुनवाई 22 जनवरी को होनी है.

माकपा के पोलित ब्यूरो की एकमात्र महिला सदस्य करात ने कहा एक जनवरी को दस लाख महिलाएं केरल में भाजपा और आरएसएस के खिलाफ मार्च करेंगी और सबरीमला मुद्दे की आड़ में राज्य में हो रहा उनका प्रवेश रोकेंगी. महिलाएं पूरे केरल में मानव कड़ी बना कर सामाजिक सुधार के पक्ष में खड़ी होंगी.

उन्होंने कहा, “यह कदम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेतृत्व में काली शक्तियों को रोकने के लिए और सामाजिक सुधारों के मूल्यों को आगे ले जाने के लिए है. यह केरल में हो रही विचारों की बड़ी लड़ाई है और महज सबरीमाला मुद्दे तक सीमित नहीं है.”

द्वि-ध्रुवीय राजनीति केरल पर हावी है, जहां वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट बड़े खिलाड़ी हैं। भाजपा, प्रदेश की राजनीति में एक अपेक्षाकृत नयी है. भाजपा ब्रह्मचारी भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए रजस्वला महिलाओं के प्रवेश का विरोध करने वाले श्रद्धालुओं को समर्थन दे रही है.

यह मंदिर 16 नवंबर को दो महीने के लंबी तीर्थयात्रा के लिए खोला गया लेकिन विरोध प्रदर्शन और हिंसा के डर से सबरीमला के आसपास निषेधाज्ञा लागू कर दी गई. भाजपा की मांग है कि इस निषेधाज्ञा को हटा लिया जाए.

करात ने कहा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने हमेशा कहा है कि एक महिला का मंदिर जाना उसकी इच्छा पर पर निर्भर है और अगर वह जाना चाहती है तो उस पर रोक नहीं लगाई जा सकती.

उन्होंने आरोप लगाया कि केवल गर्भधारण कर सकने योग्य महिला पर रोक है, क्योंकि ये माना जाता है कि मासिक धर्म वाली महिला अशुद्ध है और ऐसा मनुस्मृति में लिखा है.

माकपा की इस 71 साल की नेत्री ने कहा, ‘‘इस समस्या का कारण धार्मिक भावना में नहीं है, बल्कि सरकार को अस्थिर करने और केरल में मनुवादी विचारधारा थोपने के लिए अत्यधिक सांप्रदायिक राजनीतिक एजेंडे में है.”

उन्होंने कहा कि आरएसएस-भाजपा और कांग्रेस नेतृत्व ने भी शुरू में उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत किया था, लेकिन बाद में उन्होंने यू-टर्न ले लिया क्योंकि केरल के नायर सेवा समाज, जो शाही परिवार से जुड़े होते हैं, के एक वर्ग ने सर्वोच्च अदालत के फैसले का विरोध किया.

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भी 28 सितंबर के फैसले के कार्यान्वयन का विरोध कर रही है.

करात ने आरोप लगाया ‘‘कांग्रेस केरल में सबरीमला मुद्दे पर भाजपा-आरएसएस के विरोध का साथ दे कर, भगवा दल का राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने में उनकी सहयोगी बन गई है.’’

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+