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रिलायंस का JIO आने से लुट गई सरकारी कंपनी BSNL, 35,000 कर्मचारियों से छीनी जा रही है नौकरी

बीएसएनएल अपने 35,000 कर्मचारियों को नौकरी से हटाकर अपना घाटा कम करने की तैयारी में है.

भारतीय टेलीकॉम बाजार में जियो के आने के बाद प्राइवेट कंपनियों के साथ-साथ सरकारी कंपनी बीएसएनएल को भी भारी नुक़सान हुआ है. इसका असर इतना बुरा हुआ है कि अब बीएसएनएल अपने 35000 कर्मचारियों को नौकरी से हटाने जा रही है.

समाचार वेबसाइट ट्रैक डॉट इन के मुताबिक बीएसएनएल अपने 35,000 कर्मचारियों को नौकरी से हटाकर अपना घाटा कम करने की तैयारी में है. ख़बर के मुताबिक कंपनी ने इस दिशा में कार्रवाई शुरू भी कर दी है.

2018 तक बीएसएनएल के कुल कर्मचारियों की संख्या 1,74,000 थी. वही प्राइवेट कंपनियों में औसतन 25000 से 30000 कर्मचारी काम करते हैं. इस प्रकार बीएसएनएल के पास प्राइवेट कंपनी से पांच गुना ज्यादा कर्मचारी हैं. आईआईएम अहमदाबाद को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह पता लगाए कि बीएसएनएल इस दौर में किस तरह मजबूत बनी रह सकती है. इस रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनी को अपने 13,000 कर्मचारियों को हटाना पड़ेगा. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीएसएनएल जिन कर्मचारियों को नौकरी से हटाए उन्हें वीआरएस यानी वोलिंटरी रिटायरमेंट ऑफर दे. इसमें कुल 13,000 करोड़ रुपए की बचत होगी.

ऐसा माना जा रहा है कि इन कर्मचारियों को हटाने के बाद जो पैसे बचेंगे उससे बीएसएनएल का घाटा कम होगा. इस मामले में फाइनल रिपोर्ट भी जल्द ही पेश की जाएगी.

बीएसएनएल के प्रबंध निदेशक अनुपम श्रीवास्तव इस दिशा में कदम उठा भी चुके हैं. कंपनी के कर्मचारियों का यात्रा भत्ता (टीए) बंद कर दिया गया है और मेडिकल भत्ता भी कम किया जा रहा है. अनुपम का कहना है, “हमलोग कंपनी के कर्माचारियों के बिजली, प्रशासनिक और अन्य सुविधाओं पर खर्च होने वाले पैसे को कम कर रहे हैं. अभी किसी भी कर्मचारी को यात्रा रियायत नहीं दिया जा रहा है. मेडिकल खर्चे में भी कटौती की गई है.”

उन्होंने कहा है कि स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति प्रस्ताव का डिटेल भी लिया जा रहा है और जल्द ही इसपर निर्णय लिया जाएगा. इसका मतलब है कि जल्द ही इन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा.

नौकरी से कर्मचारियों को हटाने पर अनुपम ने कहा है, “रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी को फिलहाल बाजार में बने रहने के लिए अभी इस तरह के कई कदम उठाने होंगे. एक बार मुनाफ़े में कंपनी चली जाए उसके बाद कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधाओं को फिर से लागू किया जा सकता है.”

ख़बर के मुताबिक बीएसएनएल को जुलाई से अक्टूबर 2018 के बीच 1,925.33 करोड़ का नुक़सान हुआ है.

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