कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

CAA प्रोटेस्ट: हाथ में तिरंगा थामे भीड़ में कहां खो गया आमिर हंजला?

परिवार वालों का कहना है कि पुलिस इस मामले की तहकीकात ठीक ढंग से नहीं कर रही है.

उस मां पर क्या बीत रही होगी जिसका बच्चा पिछले सात दिनों से लापता हो. उस बाप पर क्या बीत रही होगी जो अपने बेटे के गुमशुदगी का कारण जानकर भी कुछ नहीं कर सकता. उनका बेटा लौटे या ना लौटे. कौन जानता था कि हाथ में तिरंगा थामे अचानक भीड़ में वो गायब हो जाएगा. या भीड़ उसे निगल जाएगी.

भीड़ किसी को ऐसे निगल सकती है कि उसका कुछ अंश ही न बचे? पटना से सटे फुलवारी शरीफ़ में अफवाहों का बाजार गर्म है. लोगों का कहना है कि पास के तालाब में ही दो-तीन मुसलमानों को काटकर फेंक दिया गया है. पुलिस तलाश रही है पर किसी का कोई ठिकाना नहीं है. इसमें कितनी सच्चाई है पता नहीं. लेकिन यह है कि आमिर हंजला(18) पिछले एक हफ्ते से गायब है. पुलिस रिकॉर्ड के गुमशुदगी की रिपोर्ट में बस आमिर हंजला का ही नाम है.

आमिर हंजला बस दसवीं पास है. फुलवारी के ही एक बैग कारखाने में काम करता था. राजनीति की समझ उतनी नहीं थी. CAA और NRC को लेकर भी बहुत कम समझ थी. प्रोटेस्ट में बस इसलिए चला जाता था कि ज्यादा आदमी हो तो अच्छा रहेगा. जाना चाहिए. अच्छा लगता था. हां, पर किसी पार्टी का सदस्य नहीं था.

जब 19 दिसंबर को लेफ्ट के तरफ से बिहार बंद का आह्वान किया गया तो प्रोटेस्ट में शामिल हुआ. 21 दिसम्बर को राजद के तरफ से भी जब बिहार बंद का ऐलान किया गया तो रैली में चला गया. अंतिम बार उसे इसी रैली में देखा गया. एक वीडियो में वो झंडा पकड़े भीड़ में आगे बढ़ता दिख रहा है. आस-पास परिवार के पहचान के कोई लोग नहीं है. न कोई घर का सदस्य ही इस रैली में गया था. इसलिए किसी को कुछ नहीं पता कि भीड़ में जब बवाल हुआ. पत्थरबाजी हुई. गोली चली. तो आमिर हंजला कहां गया. किस गली में मुड़ा और किसी गली में जाकर फंस गया जो अब तक लौटा नहीं!

21 दिसम्बर को राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बिहार बंद के दौरान फुलवारीशरीफ में स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी. दो समुदायों में पत्थरबाजी होने लगी. गोलियां चलीं. कई लोग घायल भी हुए.

सोहैब अहमद, जो आमिर हंजला के पिता है. बेटे के घर नहीं पहुंचने पर 21 तारीख़ की रात ही पुलिस थाने पहुंच जाते हैं. गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखवा देते हैं. लेकिन रैली में हुए झड़प में एक 18 साल का लड़का गायब है यह मीडिया में पांच दिन बाद छपता है. उस रिपोर्ट की गलत सूचनाओं पर भी परिवार को आपत्ति है.

परिवार वालों का कहना है कि पुलिस इस मामले की तहकीकात ठीक ढंग से नहीं कर रही है. पुलिस थाने जाने पर बस कहती है कि हम अमीर को ढूंढ रहे हैं, लेकिन उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं दिखती. थाने में हंसी मजाक करती दिखती है.

अब आमिर हंजला को परिवार को कैसे समझाया जाए कि पुलिस ही नहीं, इस समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता कि एक 18 साल का जवान मासूम बच्चा हमारे बीच से गायब हो गया. आमिर हंजला के पहले ही हमारी संवेदनाएं गायब हो गई है. हम समाज में हिंदू-मुस्लिम हो गए हैं. हम उस भीड़ का सामना नहीं कर सकते जो किसी को ज़िंदा निगल सकती है.

(कल आमिर हंजला के घरवालों से मुलाकात हो पाई)

(यह लेख दीपक कुमार के फ़ेसबुक पोस्ट से लिया गया है. दीपक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)

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