कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

दूसरों की फिल्मों में सीन कट करने वाले ‘संस्कारी’ पहलाज निहलानी की फिल्म में 20 सीन हटाने के निर्देश दिए सीबीएफसी ने

इसके विरोध में निहलानी ने मुबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

हिंदी में एक कहावत बहुत ही मशहूर है कि ‘बोये पेड़ बबूल का तो आम कहां से होए’. यही हो रहा है अब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी के साथ. उनके आने वाली फिल्म ‘रंगीला राजा’ में 20 दृश्यों को हटाने के निर्देश सीबीएफसी ने दिए हैं जिसके विरोध में निहलानी ने मुबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

गोविंदा को मुख्य नायक के रूप में फिल्माया गया यह फिल्म निहलानी का सीबीएफसी से अध्यक्ष के पद से हटने के बाद पहला फिल्म है.

द वायर की एक ख़बर के मुताबिक़ इस सम्बन्ध में निहलानी ने बताया कि उन्होंने सेंसर बोर्ड से फिल्म के लिए यू/ए प्रमाण पत्र मांगा था. लेकिन बोर्ड ने फिल्म में 20 कट दिए हैं जिसके ख़िलाफ़ उन्होंने बॉम्बे उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

उन्होंने आगे कहा, “मैं ख़ुद सेंसर बोर्ड का अध्यक्ष रहा हूँ और मेरे कार्यकाल में भी अदालत के आदेश पर बहुत सारी फ़िल्में सेंसर बोर्ड से पास हुई थीं. अदालत ने यह भी कहा था कि सेंसर बोर्ड का काम श्रेणी के अनुसार प्रमाण पत्र जारी करना है न कि किसी फिल्म में कट बताना.’

अब विडम्बना की बात यह है कि बतौर सीबीएफसी के अध्यक्ष पहलाज निहलानी का कार्यकाल बहुत सारी ऐसी ही विवादों से घिरा रहा. ख़ुद को ‘संस्कारी’ कहने वाले निहलानी ने अनुराग कश्यप की फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर काफी बवाल मचाया था. शाहिद कपूर की इस फिल्म में निहलानी ने 94 दृश्यों को हटाने के लिए कहा था जिसके ख़िलाफ़ बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक दृश्य को हटाकर फिल्म को रिलीज़ करने के आदेश दिए. इस दौरान उच्च न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि सेंसर बोर्ड दादी माँ की तरह बर्ताव न करे.

जनवरी, 2015 में अध्यक्ष के रूप में सेंसर बोर्ड में नियुक्त हुए निहलानी ने कई फिल्मों में ऐसा ही किया. ज्ञात हो कि जेम्स बांड सीरीज़ की एक फिल्म में एक किसिंग सीन को लेकर भी निहलानी ने काफी हंगामा किया था और जबरन उस सीन को घटाकर आधा करने के लिए कहा था.

इसी तरह से प्रकाश झा की फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माय बुर्क़ा’ के कई सीन्स को लेकर निहलानी ने उस फिल्म को प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया था. महिला किरदारों की जिंदगियों के इर्द-गिर्द बने इस फिल्म को प्रमाण पत्र न देने के लिए बोर्ड ने अपने कुछ वाहियात तर्क भी दिए लेकिन फिर आखिरकार वह फिल्म रिलीज़ हुई.

साल 2008 में हुए अहमदाबाद बम विस्फोट पर बनी फिल्म ‘समीर’ के एक डायलॉग को लेकर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति जताई थी. उस वक़्त भी सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी थे. यह आपत्ति फिल्म के एक डॉयलॉग को लेकर है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ का ज़िक्र आता है. फिल्म आख़िरी सीन में मुख्य किरदार और खलनायक के बीच संवाद होता है. मुख्य किरदार कहता है, ‘एक मन की बात कहूं, तुम कैरेक्टर अच्छा बना लेते हो’. इस पर खलनायक कहता है, ‘वैसे सर, चाय से चू** बनाना आप से ही सीखा है.’

इम्तियाज़ अली की फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ के ट्रेलर को लेकर भी पहलाज निहलानी ने आपत्ति जताई थी. एक ट्रेलर में शाहरुख़ खान और अनुष्का शर्मा के किरदारों के बीच हो रही बातचीत में ‘इंटरकोर्स’ (संभोग) शब्द से सीबीएफसी प्रमुख पहलाज निहलानी को आपत्ति थी. निहलानी ने कहा था, ‘हमने इस डायलॉग से इंटरकोर्स शब्द डिलीट करने की शर्त पर इस ट्रेलर को यू/ए सर्टिफिकेट दिया था.

वहीं 2015 में निहलानी ने ‘मेरा देश महान’ नामक एक विडियो बनाया जो प्रधानमंत्री मोदी के गुणगान के लिए बनाया गया था. ऐसा कहा गया कि इस विडियो में दिखाए कई विकास कार्यों के दृश्य हमारे देश के ही नहीं थे और विदेशों के दृश्य दिखाकर दर्शकों को छलने की कोशिश की गई. इस वजह से इस विडियो की सोशल मीडिया पर भी काफी फ़ज़ीहत हुई.

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