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CBI का राजनीतिक नियंत्रण से मुक्त होने का समय आ गया है: पूर्व सीजेआई आरएम लोढ़ा

‘हर सरकार CBI का प्रयोग और प्रभावित करती है लेकिन यह मामला न्यायालय के अधीन है.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कथित तौर पर एक पैनल द्वारा आलोक वर्मा को हटाने के मामले में भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश आरएम लोढ़ा ने शनिवार, 12 जनवरी  को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की स्वतंत्रता को लेकर टिप्पणी की.

एएनआई से बात करते हुए लोढ़ा ने कहा, “जांच एजेंसी को स्वतंत्रता दी जानी है. समय आ गया है कि इसे राजनीतिक कार्यकारिणी से अलग किया जाए. जब तक इस पर राजनीतिक कार्यकारिणी का नियंत्रण बना रहेगा, जो भी सत्ता में है, इस प्रकार की घटनाएं होती रहेंगी.”

इससे पहले 11 जनवरी को इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए लोढ़ा ने कहा था कि ऐसे कई तरीके हैं जिनके माध्यम से CBI राजनीतिक हस्तक्षेप के बावजूद “प्रमुख जांच एजेंसी” बन सकती है.

उन्होंने आगे कहा, “हर सरकार CBI का प्रयोग करती है और उसे प्रभावित करती है लेकिन मुझे लगता है कि यह मामला न्यायालय के अधीन है. यह कोयला घोटाला मामले के दौरान सामने आया था और इसके बाद यह जारी रहा. CBI की स्वतंत्रता को अदालतों द्वारा या किसी अन्य माध्यम से सुनिश्चित किया जाना चाहिए.”

लोढा ने CBI को “पिंजरे में कैद तोता” के रूप में भी संदर्भित करते हुए कहा, “तोता तब तक आसमान में पूरी तरह से नहीं उड़ सकता जब तक उसे खुला नहीं छोड़ा जाएगा.”

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