कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग पर अपनी पीठ थपथपा रही थी मोदी सरकार, अब ISRO के वैज्ञानिकों के वेतन में कर रही कटौती

सरकार के इस फ़ैसले से वैज्ञानिक हैरान और दु:खी हैं.

चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग के बाद एक तरफ पूरा देश इसरो के वैज्ञानिकों की उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है. लेकिन, सरकार के एक फ़ैसले के कारण इसरो के वैज्ञानिक और कर्मचारी बेहद हैरान और दु:खी हैं. सरकार ने वैज्ञानिकों की सैलरी में कटौती का आदेश जारी किया है. वैज्ञानिकों ने इसरो के चेयरमैन को पत्र लिखकर आदेश वापस लेने के लिए सरकार के पास मदद की गुहार लगाने की अपील की है.

आजतक की ख़बर के अनुसार इसरो के वैज्ञानिक संगठन स्पेस इंजीनियर्स एसोसिएशन (SEA) ने इसरो के चेयरमैन डॉक्टर के. सिवन को पत्र लिखकर तनख्वाह में कटौती के आदेश को रद्द करवाने में मदद करने की मांग की है. वैज्ञानिकों के अनुसार उनके पास सैलेरी के अलावा कमाई का कोई अन्य साधन नहीं है.

क्या कहता है सरकारी आदेश:

केंद्र सरकार ने 12 जून 2019 को आदेश जारी करते हुए कहा था कि इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को साल 1996 से वेतन वृद्धि के तौर पर मिलने वाली दो अतिरिक्त प्रोत्साहन अनुदान राशि बंद कर दी जाएगी.

छठें वेतन आयोग की सिफाारिशों के आधार पर वित्त मंत्रायल और व्यय विभाग ने अंतरिक्ष विभाग को सलाह दी है कि वह प्रोत्साहन राशि बंद करे. इसकी जगह सिर्फ परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम (PRIS) ही लागू किया जाए. सरकारी आदेश के अनुसार 1 जुलाई 2019 से प्रोत्साहन राशि बंद हो जाएगी.

ग़ौरतलब है कि अब इसरो के D, E, F और G श्रेणी के वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी. इन श्रेणियों में आने वाले तकरीबन 85 से 90 फीसदी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की तनख्वाह में 8 से 10 हजार रुपए की गिरावट आएगी.

SEA के अध्यक्ष ए. मणिरमन ने पत्र में कहा है-

  • सरकारी कर्मचारी की सैलेरी में किसी भी तरह की कटौती तब तक नहीं की जा सकती, जब तक गंभीर स्थिति सामने न आए. सैलेरी में कटौती की वजह से वैज्ञानिकों का उत्साह कम हो जाएगा. हम केंद्र सरकार के फैसले से बेहद हैरन और दुःखी हैं.
  • केंद्र सरकार ने आदेश में परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम (PRIS) का जिक्र किया है. हम बताना चाहते हैं कि अतिरिक्त वेतन वृद्धि और PRIS दोनों अलग-अलग हैं. एक इंसेंटिव और दूसरा तनख्वाह है. दोनों किसी भी तरह से एक-दूसरे की पूर्ति नहीं करते हैं.
  • छठे वेतन आयोग में भी इस वेतन वृद्धि को जारी रखने की सिफारिश की गई थी और कहा गया था कि इसका लाभ इसरो वैज्ञानिकों को मिलते रहना चाहिए.

बता दें कि राष्ट्रपति द्वारा इसरो के वैज्ञानिकों के लिए दो अतिरिक्त वेतन बढ़ोतरी की इजाजत दी गई थी. ताकि देश के युवाओं को वैज्ञानिक बनने का प्रोत्साहन मिले.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद साल 1996 में अंतरिक्ष विभाग ने अतिरिक्त वेतन वृद्धि लागू किया था. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया था कि इस वेतन वृद्धि को स्पष्ट रूप से ‘तनख्वाह’ माना जाए.

You can also read NewsCentral24x7 in English.Click here
+