कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

भूपेश बघेल का ऐलान, स्कूलों के मिड-डे मील में अंडा किया जाए शामिल

जो बच्चे अंडे का सेवन नहीं करते हैं, उन्हें अंडे की जगह दूध या अन्य प्रोटीन युक्त उत्पादों को परोसा जाएगा.

छत्तीसगढ़ में बघेल सरकार ने मंगलवार को घोषणा की है कि राज्य स्कूलों के मिड-डे मील में अंडे को शामिल किया जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी अधिकारियों ने कहा कि अगर बच्चे या उनके माता-पिता अंडे का सेवन करने की मंजूरी नहीं देते हैं तो अंडे की जगह दूध या अन्य प्रोटीन युक्त उत्पादों को परोसा जाएगा.

इसके अलावा सरकारी सर्कुलर में ये भी कहा गया है कि सोया मिल्क, एनिमल मिल्क, प्रोटीन क्रंच, फोर्टिफाइड सोया बिस्कुट और सोया पापड़ जैसी चीजें भी परोसी जा सकती हैं. वहीं मिड-डे मील में स्थानीय, मौसमी फल और साबुत अनाज चावल भी परोसे जाने चाहिए. सर्कुलर के मुताबिक, अधिकारियों ने 19 जिलों के 66 स्कूलों के पोषण गुणों के लिए मिड-डे मील के नमूनों का परीक्षण किया.

स्क्रॉल रिपोर्ट के अनुसार 47 स्कूलों में भोजन में मौजूद कैलोरी की संख्या 85 प्रतिशत से अधिक थी, लेकिन निर्धारित मात्रा के 100 प्रतिशत से भी कम थी. नौ स्कूलों में कैलोरी की संख्या निर्दिष्ट आंकड़े के 85 प्रतिशत से कम थी. इसके अलावा केवल दो स्कूलों में छात्रों को पूरी तरह से पौष्टिक भोजन दिया जाता है.

जुलाई 2018 से एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने अंडों का प्रावधान मिड-डे मील में अनिवार्य कर दिया. बता दें कि राष्ट्रीय पोषण संस्थान, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के तत्वावधान में काम करता है.

ग़ौरतलब है कि योजना के तहत  11 भाजपा शासित राज्य – हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान (कांग्रेस सरकार अब), गुजरात, मध्य प्रदेश (कांग्रेस सरकार अब), महाराष्ट्र, गोवा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर में बच्चों अंडे नहीं परोस रहे हैं.

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