कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

मैं ईसाई कव्वाली के साथ-साथ ‘हे दुखभंजन’ भी गाता हूँ, मुझे कपड़ों से मत पहचानिए: सुशील बर्नार्ड, देखें विडियो

इस क्रिसमस नफ़रत को नकार साझी विरासत को बढ़ाने वाले शख़्सियतों की बातें सुनिए.

सुशील बर्नार्ड ईसाई कव्वाली के गायक हैं. इन्हें साहिल सूफ़ी निज़ाम भी कहा जाता है. सुशील कहते हैं, “लोग मेरी ओर देखकर हैरान हो जाते हैं. पूछते हैं कि मैं ‘हे दुखभंजन’ और ‘ईसाई कव्वाली’ साथ-साथ कैसे गा सकता हूँ. पर मैं तो यीशु को भी उतना ही मानता हूँ जितना अल्लाहताला और रामजी को.”

सुशील का मानना है कि संगीत की कोई भाषा या धर्म नहीं होती. यह हमें भगवान से जोड़ने का साधन है. इसकी कोई सीमा नहीं है. उनका कहना है, ” मैं प्रभु के लिए गाता हूँ और गाता रहूँगा.”

इस क्रिसमस जब देश के प्रधानमंत्री लोगों को उनके कपड़े के आधार पर पहचानने की बात करते हैं, हमें सुशील बर्नार्ड को सुनना चाहिए और मोहब्बत-साझी विरासत का पैग़ाम दूर-दूर तक फैलाना चाहिए. यही भारत है.

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