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मोदी जी की गोदी में एक और संस्थान, CIC ने आरटीआई का उल्लंघन कर रहे PMO के ख़िलाफ़ सुनवाई को टाला

मोदी सरकार से उनके मंत्रियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी, जिसका जवाब सरकार नहीं दे रही थी.

मोदी सरकार के मंत्रियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की जानकारी मांगी गई थी. लेकिन, प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन जानकारियों को साझा करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद केंद्रीय सूचना आयोग में इसकी शिकायत की गई, लेकिन इस संस्था ने भी समय की कमी का हवाला देते हुए फिलहाल इस मामले को 17 जून 2019 तक के लिए टाल दिया है.

भ्रष्टाचार की निगरानी करने वाली यह संस्था नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी. संजीव चतुर्वेदी ने मोदी सरकार के मंत्रियों से जुड़े भ्रष्टाचार की जानकारी मांगी थी, जिसे केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बावजूद भी प्रधानमंत्री कार्यालय ने देने से इनकार कर दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, संजय चतुर्वेदी द्वारा दायर आरटीआई आवेदन का जवाब देते हुए, अक्टूबर 2018 में पीएमओ ने कहा था कि  उसे समय-समय पर कई केंद्रीय मंत्रियों और उच्च पदस्थ पदाधिकारियों के ख़िलाफ़ शिकायतें मिलती रहती है.

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा आरटीआई के जवाब में कहा गया था कि इन शिकायतों में भ्रष्टाचार और गै़र-भ्रष्टाचार से संबंधित कई मामले हैं. इन सभी शिकायतों को भ्रष्टाचार से जोड़कर जांच करना बोझिल काम हो सकता है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए इस संबंध में जानकारी देने से इनकार कर दिया था.

पीएमओ के इस जवाब से निराश होकर संजीव चतुर्वेदी ने सीआईसी की तरफ रूख किया था.

चतुर्वेदी ने अपने दलील में कहा कि आरटीआई की  धारा 7(9) के तहत पीएमओ सूचना देने से इनकार नहीं कर सकता. उनका कहना है कि सिर्फ आरटीआई की धारा 8 (1) के तहत ही सूचना देने से  किया जा सकता है.

बीते 1 मई को जारी अपने आदेश में मुख्य सूचना आयुक्त सुधीर भार्गव का कहना है, “दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद रिकार्ड्स का ध्यानपूर्वक अध्ययन करने के बाद हमने यह पाया है कि समय की कमी के कारण अभी यह सुनवाई पूरी नहीं की जा सकती. इस मामले को 17 जून 2019 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.

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