कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नागरिकता संशोधन विधेयक पर भाजपा को नहीं मिलेगा जदयू का साथ

जदयू पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.त्यागी ने कहा है, "हमने नागरिकता संशोधन विधेयक (2016) का विरोध करने का फ़ैसला किया है, क्योंकि यह विधेयक असमिया अस्मिता के साथ छेड़छाड़ है."

मोदी सरकार के सहयोगी नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यू) पूर्वोत्तर में भाजपा की मुश्किलें खड़ी कर सकता है. पार्टी ने नागरिकता संशोधन विधेयक (2016) का राज्यसभा में विरोध करने का फैसला किया है. इसके साथ ही पार्टी असम में अपने प्रतिनिधियों को भेजकर असम गण परिषद के आंदोलन का समर्थन करेगी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पटना में जदयू की बैठक में यह फ़ैसला लिया गया. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के.सी.त्यागी ने कहा है, “हमने नागरिकता संशोधन विधेयक (2016) का विरोध करने का फ़ैसला किया है, क्योंकि यह विधेयक असमिया अस्मिता के साथ छेड़छाड़ है. पार्टी ने फ़ैसला किया है कि मैं और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर 27 जनवरी को गोवाहटी जाऊं.”

के.सी.त्यागी ने कहा कि हमें असम या पूर्वोत्तर के किसी भी राज्य में लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना है, इसलिए हमें इस विधेयक का विरोध करने से कोई नुकसान नहीं होगा.

बता दें कि बीते 8 जनवरी को ही लोकसभा ने नागरिकता संशोधन विधेयक को पारित कर दिया है. अब इसे राज्य सभा में पेश किया जाना है. यह विधेयक भारत की नागरिकता हासिल करने के 1955 के कानूनी प्रावधानों में हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को छूट देने के लिए लाया जा रहा है.

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