कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

CJI रंजन गोगोई के हाथों अर्वाड लेने से लॉ टॉपर का इनकार, मुख्य न्यायाधीश पर यौन शोषण मामले में कोर्ट के रवैये से थीं नाराज़

‘कानून की पढ़ाई के दौरान मैने जो कुछ भी क्लास में सीखा है उसके कारण पिछले कुछ हफ़्तों से मैं सीजेआई रंजन गोगोई से अवार्ड लेने को लेकर असमंजस में थी.'

नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी,दिल्ली के मास्टर ऑफ़ लॉ (एलएलएम) में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली छात्रा सुरभी कारवा को बीते शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के हाथों गोल्ड मेडल दिया जाना था. लेकिन, वह दीक्षांत समारोह में नहीं पहुंचीं. इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़, सुरभी को मेडल मिलने की पूरी जानकारी थी. लेकिन वो सीजेआई रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण मामले में कोर्ट के रवैये से नाराज थीं.

ख़बर के अनुसार, सुरभी ने कहा कि, ‘कानून की पढ़ाई के दौरान मैने जो कुछ भी क्लास में सीखा है उसके कारण पिछले कुछ हफ़्तों से मैं सीजेआई रंजन गोगोई से अवार्ड लेने को लेकर असमंजस में थी. क्योंकि, वह संस्थान के हेड हैं. वह संस्थान उनके ख़िलाफ़ लगे यौन शोषण के मामले को हैंडल करने के मामले में विफल रही है. मैं ख़ुद ही एक जवाब तलाश रही हूं कि कैसे एक वकील संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में अहम भूमिका निभा सकता है. और सीजेआई ने अपने भाषण में इसका उल्लेख भी किया है.’

सुरभी संवैधानिक कानून में विशेषज्ञता प्राप्त की हैं और उनके थीसिस का विषय भी ‘क्या संविधान एक नारीवादी दस्तावेज है?’ था.

हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि वह इस सम्मान को अस्वीकार नहीं कर रही हैं. उन्होंने कहा कि, ‘गोल्ड मेडल प्राप्त करना अपने आप में एक सम्मान है और मैं अपने माता-पिता और शिक्षकों का शुक्रगुज़ार हूं जिन्होंने मेरी मदद की.

ग़ौरतलब है कि बीते अप्रैल में एक महिला ने सीजेआई रंजन गोगोई के ख़िलाफ़ यौन शौषण का आरोप लगाया था. महिला ने सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को 29 पेज का हलफनामा भेज कर कहा था कि उनके ख़िलाफ़ हुए यौन शौषण का विरोध करने पर उनका तबादला किया गया और फिर प्रशासनिक जांच के बाद उन्हें बर्खास्त कर दिया गया.

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