कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

एक भीड़ ने साम्प्रदायिक हिंसा में योगेन्द्र यादव के दादाजी का गला काट दिया. जानें फिर उनके पिता ने क्या किया..देखें विडियो

योगेन्द्र यादव की कहानी हमें कई तरह के सबक सिखाती है.

स्वराज इंडिया के संस्थापक योगेन्द्र यादव ने सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी एक आप बीती बयान की है. टीवी चैनल इंडिया टुडे के एक कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के सोशल मीडिया टीम के मुखिया अमित मालवीय से बहस के दौरान योगेन्द्र यादव ने बताया कि सांप्रदायिक हिंसा ने उनके परिवार के जीवन को काफ़ी प्रभावित किया है, लेकिन उन्होंने इसका इस्तेमाल कभी भी सहानुभूति बटोरने के लिए नहीं किया. योगेन्द्र यादव ने कहा है कि मुसलमानों की भीड़ ने उनके दादाजी की हत्या कर दी थी, लेकिन उनके पिता ने नफ़रत करने की बजाय अपने बच्चों का नाम मुसलमानों के नाम पर रखा.

जातिवाद की राजनीति करने के आरोप का जवाब देते हुए योगेन्द्र यादव ने कहा, “जातिवाद से जुड़ा मेरा एक भी विडियो क्लिप दिखा दीजिए. मैं चुनाव से ही नहीं बल्कि पब्लिक लाइफ को भी अलविदा कह दूंगा.” इसके बाद योगेन्द्र यादव ने कहा, “मेरे दादाजी रामसिंह की हत्या मेरे पिता के सामने ही एक मुस्लिम भीड़ द्वारा कर दी गई थी. वह महात्मा गांधी का दौर था. मेरे पिता भी उस समय आपलोगों की तरह हिन्दू-हिन्दू की रट लगाने वाले बन सकते थे, लेकिन उन्होंने महात्मा गांधी के रास्ते पर चलना पसंद किया. मेरे पिता ने निश्चय किया कि वे अपने बच्चों का नाम इस्लाम धर्म से मिलता जुलता रखेंगे.”

योगेन्द्र यादव ने आगे कहा, “मेरी कहानी ऐसी है. मुझे नहीं लगता कि आपके जैसा व्यक्ति इन भावनाओं का कद्र कर पाएगा. मैंने आज तक अपनी कहानी बताकर सहानुभूति से वोट पाने की कोशिश नहीं की. अगर इस तरह का कोई विडियो या किसी भी तरह के सबूत हैं, तो मुझे दीजिए मैं चुनाव ही नहीं पब्लिक लाइफ से हमेशा के लिए चला जाऊंगा.”

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