कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

शिव ‘राज’ का विशेषाधिकार, दिग्विजय को छोड़ भाजपा के तीन पूर्वमुख्यमंत्रियों को दोबारा किया बंगला आवंटन

नहीं माना सुप्रीम कोर्ट का आदेश

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा था कि सरकारी पद से हटने के बाद नेताओं को सरकारी बंगलों में रहने का अधिकार नहीं है। इस आदेश के बाद मध्यप्रदेश में बंगले खाली करवा दिए गए थे।

एएनआई के एक ट्वीट में बताया गया कि एक बार फिर शिवराज सरकार ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर उमा भारती, कैलाश चंद्र जोशी और बाबूलाल गौर को बंगले वापस कर दिए। इस विशेषाधिकार के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों में से दिग्विजय सिंह को छोड़कर बाकी तीनों को प्रदेश के ‘गणमान्य नागरिक’ का दर्जा देते हुए सरकारी बंगले वापस आवंटित कर दिए गए हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इस विशेषाधिकार के तहत पूर्वमुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को इसका लाभ नहीं दिया गया है।

टाइम्स नाउ के अनुसार पार्टी के नेताओं की सलाह पर मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से दोबारा बंगले पाने के लिए आवेदन मंगाए। इसमें नेताओं ने बंगला देने की गुजारिश करते हुए उसके लिए कारण भी दिए। कैलाश जोशी ने यह कहते हुए आवेदन किया कि समाजसेवी होने के नाते उन्हें बंगला मिलना चाहिए। बाबूलाल गौर ने लंबे समय से विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री होने का हवाला दिया। जबकि उमा भारती ने कहा कि वह केंद्रीय मंत्री हैं और उन्हें कई बार भोपाल आना-जाना होता है इसलिए बंगला दिया जाए।

हालांकि इन नेताओं को बंगले का किराया देना होगा। लेकिन सरकार ने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर भाजपा से ही आने वाले तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों को ही इसका लाभ दिया और दिग्विजय सिंह को इस लाभ से दूर रखा गया। सरकार का यह फैसला सवालों के घेरे में है।

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