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मोदी सरकार के लिए सिर्फ ‘राजनीतिक फुटबाल’ है तीन तलाक: कांग्रेस

सुरजेवाला ने यह आरोप लगाया कि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद इस मामले में गुमराह कर रहे हैं।

नयी दिल्ली, 19 सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने एक बार में तीन तलाक के खिलाफ केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को स्वीकृत अध्यादेश में गुजारा भत्ते को कथित तौर पर स्पष्ट नहीं किए जाने और कुछ अन्य प्रावधानों लेकर सवाल खड़े किए तथा आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ‘फर्जी श्रेय’ लेने के लिए इस मुद्दे का ‘राजनीतिक फुटबाल’ के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी आरोप लगाया कि कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद इस मामले में गुमराह कर रहे हैं।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद लोगों को गुमराह कर रहे हैं। वह इन दिनों कांग्रेस के खिलाफ आरोप लगाने और झूठ बोलने का काम कर रहे हैं’’

उन्होंने कहा, ‘‘तीन तलाक पर फर्जी श्रेय लेने और अपनी पीठ थपथपाने के बजाय प्रधानमंत्री मोदी और कानून मंत्री को इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि 26 मई, 2014 से लेकर उच्चतम न्यायालय का फैसला आने तक वे तीन तलाक पर विधेयक या अध्यादेश लेकर क्यों नहीं आए?’’

उन्होंने कहा, ‘‘अध्यादेश में गुजारा भत्ते को न तो परिभाषित किया गया है और न ही राशि तय की गई है, ऐसा क्यों? एक बार में तीन तलाक को साबित करने की जिम्मेदारी महिला की क्यों होनी चाहिए?’’

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ‘फर्जी श्रेय’ लेने के लिए इस मुद्दे का ‘राजनीतिक फुटबाल’ के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘तीन तलाक एक अमानवीय प्रथा थी जिसे उच्चतम न्यायालय ने रद्द कर दिया। जब न्यायालय ने इसे रद्द कर दिया तो यह कानून बन गया। हमारे लिए यह हमेशा से मानवीय मामला और महिलाओं को अधिकार दिलाने का मामला रहा है। हमारे कई नेताओं ने न्यायालय में महिलाओं की पैरवी भी की।’’

सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘‘मोदी जी नहीं चाहते कि मुस्लिम महिलाओं को न्याय मिले। मोदी सरकार के लिए यह मामला राजनीतिक फुटबाल है और मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय का मामला नहीं है।’’

केंद्रीय कैबिनेट ने एक साथ तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने के लिए बुधवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दी। इस अध्यादेश के तहत एक साथ तीन तलाक देना अवैध एवं निष्प्रभावी होगा और इसमें दोषी पाए जाने पर पति को तीन साल जेल की सजा का प्रावधान है।

‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक’ को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी है। फिलहाल यह राज्यसभा में लंबित है।

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