कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

ग्राउंड रिपोर्टः ‘अपनी परेशानियां बताते-बताते शर्म आने लगी है’- दिल्ली की पाकिस्तानी हिंदू कॉलोनी में मूलभूत सुविधाओं के लिए सालों से तरसते शरणार्थी

कॉलोनी के प्रधान का कहना है कि वे सी.एम. अरविंद केजरीवाल से लेकर केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन तक गुहार लगा चुके हैं लेकिन किसी समस्या का समाधान नहीं किया गया.

“देश के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू हैं.” ये शब्द उन बच्चों के हैं जो पाकिस्तानी हिंदू कॉलोनी में शरणार्थी के रूप में रहते हैं. जिन्हें भारत के प्रधानमंत्री का नाम नहीं पता है. 4 से 6 कक्षा में पढ़ने वाले इन बच्चों के भविष्य के क्या होगा यह कोई नहीं जानता.

उत्तरी दिल्ली के आदर्श नगर में स्थित यह कॉलोनी अब पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों का घर है. अपनी धार्मिक पहचान को बनाए रखने के लिए इन परिवारों को पाकिस्तान छोड़कर भारत आना पड़ा. लेकिन भारत में रहने का यह फैसला इतना आसान नहीं है क्योंकि मिट्टी के बने घरों में रहनेवाले इन लोगों को अभी तक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं.

पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी कॉलोनी, (फोटो- शिवानी भंडारी)

मूलभूत सुविधाओं से वंचित

आर्दश नगर से कुछ दूर पैदल चलने के बाद मजलिस पार्क मैट्रो (पिंक लाइन) से कुछ दूरी पर एक बड़े खुले मैदान में मौजूद है पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी कॉलोनी.

इस जगह को कॉलोनी तो कहा जाता है लेकिन इसके हालात किसी बस्ती से कम नहीं है. देश की राजधानी में मिट्टी के बने झोपड़े, खुली रसोइयां, मिट्टी के चूल्हे, स्वच्छता का अभाव, घरों के बगल में खुली गंदी नालियां और बिना बिजली-पानी के जीवन बिताने की कठिनाई का दर्द यह कॉलोनी बखूबी बयां करती है.

स्वच्छता का आभाव,घरों के बीच खुल- गंदी नाली (फोटो- शिवानी भंडारी)

140 परिवारों की इस बस्ती में 700 से ज्यादा लोग रहते हैं. जिनमें 180 बच्चे और 240 महिलाएं शामिल हैं. बस्ती 2 भागों में बंटी हुई है. एक बस्ती में 2013 में भारत आए शारणर्थी रहते हैं तो दूसरी बस्ती डेढ़ साल पहले आए शरणर्थियों ने बसाई है.

कांजी ठाकुर, जो ढेड साल पहले सिंध पाकिस्तान से आए हैं, नई बस्ती में झोपड़े खड़े करके रहने के साधन जुटा रहे हैं. उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में खेतों में काम करने के बाद जमीदार पैसे नहीं देते थे. इसलिए हम भारत आ गए. लेकिन यहां के हालात भी ठीक नहीं है. झोपड़े वाले घर, चूल्हे पर खाना पकाना, बिजली, पानी, खुली नालियां और जानलेवा बीमारियों की तकलीफों ने चारों तरफ से घेर रखा है.”

कांजी ठाकुर, (फोटो- शिवानी भंडारी)

इस बस्ती के हालात बरसात के मौसम में और भी खराब हो जाते हैं. कॉलोनी के भीतर घुटनों तक पानी भर जाता है. कुड़े और मलबे के साथ मिलने के बाद बस्ती में नाले और रास्ते में फर्क नजर नहीं आता है. लोगों की रसोइयों और घरों के भीतर भी पानी भर जाता है. बस्ती के जमा पानी में डेंगू, मलेरिया के मच्छर उत्पन्न होते हैं.

पानी के लिए तरसते लोग

सरकार की तरफ से इन परिवारों के लिए पूरे दिन में पीने के पानी का 1 टैंकर आता है जो 700 लोगों के लिए पूरा भी नहीं पड़ता. इसके अलावा यहां लोगों के पास और कोई साधन नहीं है. भरी गर्मी में नंगे पांव बस्ती से सड़क तक बाल्टी, केन लेकर लोग टैंकर के पास भीड़ लगाकर खड़े हो जाते हैं ताकि वे पूरे दिन के लिए पीने का पानी जुटा सकें.

पीने के पानी के लिए तरसते बस्ती वाले, (फोटो- शिवानी भंडारी)

बस्ती में 1-2 जगह हैंडपंप तो लगे लेकिन उस पानी से बदबू आती है. इसलिए कॉलोनी के लोग हैंडपंप के पानी को केवल कपड़े-बर्तन धोने और नहाने के लिए इस्तेमाल करते है.

बस्ती में शौचालय के हालात भी बहुत बुरे हैं. सफाई करने के लिए कोई कर्मचारी नहीं आता है. पानी की टंकी रखी गई है लेकिन उसमें पानी नहीं है.

एक साल से नहीं है बिजली

“एक साल हो गया कॉलोनी में बिजली और पानी की समस्या हल नहीं होती है. बहुत नेता और लोग आए सभी ने बोला कि बिजली-पानी की समस्या हल कर देंगे. लेकिन कुछ नहीं हुआ.” 6 साल पहले पाकिस्तान के सिंध से 60 वर्षीय मोहिनी अपने परिवार के साथ भारत आईं थी. उम्मीद थी एक बेहतर जिंदगी. हालांकि उन्हें  यहां मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है. लेकिन भारत में अपने लोगों के बीच रहने की लालस उन्हें यहां तक खींच लाई.

भरी दोपहरी में एक झोपड़े की ओट में बैठी मोहिनी बताती हैं कि अपना भरन-पोषण करने के लिए कॉलोनी का पुरुष वर्ग आजादपुर मंडी में मजदूरी का काम करते हैं. कुछ बच्चे मैट्रो स्टेशन पर मोबाइल कवर बेचते हैं. जिससे उनका गुजारा होता है. मोहिनी के बेटे खुद आजादपुर मंडी में मजदूरी कर रहे हैं.

झोपड़े की ओट में बैठी मोहिनी, (फोटो- शिवानी भंडारी)

उन्होंने बताया, “पाकिस्तान में जैसे-तैसे 50 साल बीता लिए लेकिन वहां जिंदगी के हालात ठीक नहीं थे, रोज़गार की समस्या थी. जिसकी वजह से जीवन बिताना बहुत मुश्किल था. हमने तो कैसे भी अपनी जिंदगी काट ली, लेकिन आने वाली पीढ़ी के लिए कुछ बेहतर सोचकर भारत आ गए. यहां अपने लोग हैं.”

मोहिनी कहती हैं, “बिजली है तो बहुत सुख है, बाकी तो कमा कर खा लेंगे. लेकिन एक साल से बिजली नहीं है गर्मी में रहना पड़ता है.”

आधार में झूलता बच्चों का भविष्य

इस बस्ती में दाखिल होते ही सामने झोपड़ी के आकार की एक पाठशाला है. जिसमें बस्ती के बच्चे ट्यूशन पढ़ते हैं. इन बच्चों को पढ़ाने के लिए 1 शिक्षक हैं — विक्रम जो एक साल पहले पाकिस्तान से भारत आए हैं, और खुद इसी बस्ती के निवासी हैं. वे लगभग 110 बच्चों को 2 शिफ्टों में अकेले पढ़ाते हैं.

बेहतर शिक्षा की तलाश में कॉलोनी के बच्चे, (फोटो- शिवानी भंडारी)

इनके पास 50 से ज्यादा लड़के और लगभग 60 लड़कियां पढ़ने आती हैं. विक्रम पाकिस्तान में पिछले 16 सालों से टीचर का काम करते थे.

उन्होंने बताया, “यहां के अधिकतर बच्चे उर्दू और गुजराती भाषा जानते हैं. जिसकी वजह से उन्हें पढ़ाई में दिक्कतें होती है.”

बच्चों के भविष्य पर चिंता जाहिर करते हुए विक्रम ने कहा, “इन बच्चों का भविष्य क्या होगा पता नहीं. कुछ बच्चों को सरकारी स्कूलों में आधार कार्ड की वजह से अभी तक एडमिशन नहीं मिला है. 12-13 साल के बच्चें हैं जो दिनभर बस्ती में घुमते रहते हैं क्योंकि इनका स्कूल में दाखिला नहीं हो पाया है.”

बस्ती के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते टीचर विक्रम, (फोटो- शिवानी भंडारी)

उन्होंने बताया, “जिन बच्चों के आधार कार्ड हैं वे आदर्श नगर के सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं. लेकिन जो 1 साल पहले नए बच्चे आए हैं उनका आधार कार्ड नहीं है जिसकी वजह से बच्चों को दाखिला नहीं मिलता है.”

नेता बस्ती के हालातों से वाकिफ, नहीं हुआ समाधान

बस्ती के प्रधान नेहरू लाल, जो 2013 में 500 लोगों के साथ पाकिस्तान के सिंध-हैदराबाद बाद से भारत आए थे, मीडिया और नेताओं के प्रति गहरी नाराजगी जाहिर करते हैं . उन्होंने बताया,“जब से भारत आए हैं तब से अपनी समस्याओं को लेकर सीएम अरविंद केजरीवाल से लेकर भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन जैसे बड़े नेताओं से मुलाकात करके समस्याओं को हल करने की गुहार लगा चुके हैं. लेकिन किसी ने कुछ नहीं किया.”

नेताओं से नाखुश प्रधान नेहरू लाल, (फोटो- शिवानी भंडारी)

बस्ती के प्रधान नेहरू लाल ने भाजपा नेता हर्षवर्धन पर आरोप लगाते हुए कहा, “हमारी कॉलोनी में डॉ. हर्षवर्धन भी आ चुके हैं. यहां के हालातों से वे अच्छी तरह वाकिफ है. उन्होंने बस्ती का दौरा किया, लोगों से बातचीत की और समस्या हल करने का आश्वासन भी दिया. लेकिन अब तक हमारी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है.”

उन्होंने आगे कहा, “2013 से आपके जैसे बहुत लोग यहां आए हैं लेकिन हमारे हालात बिल्कुल नहीं बदले, अब तो अपनी समस्याएं बताने में भी शर्म आती है. जब कुछ होता नहीं है तो अपनी समस्या बताने का क्या फायदा?”

“क्या आप जानते हैं दिल्ली जैसे शहर में बिना बिजली और पानी के रहना कितना मुश्किल है? हम ज़िल्लत की जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं.”

न्यूज़सेन्ट्रल24×7  ने इस विषय पर आर्दश नगर के विधायक पवन कुमार शर्मा से फोन पर सवाल किए.  बस्ती में बिजली की समस्या को लेकर  पवन कुमार शर्मा ने कहा, “बिजली कनेक्शन के लिए  लैंड ओनिंग एजेंसी  की मंजूरी नहीं मिल रही है. क्योंकि बिजली विभाग मीटर कनेक्शन तब लगता है जब ज़मीन के मालिक कागज़ात इत्यादि प्रूफ के तौर पर दिखाते  हैं जिसके बाद लाइट कनेक्शन के लिए परमिशन दिया जाता है. चूंकि यह केंद्र की ज़मीन है इसलिए लैंड एजेंसी परमिशन नहीं देती है.”

न्यूज़सेन्ट्रल24×7  से  बातचीत करते हुए  पीने के पानी की समस्या को लेकर उन्होंने कहा, “पानी तो जाता रहता है. वहां के लोगों को बोला गया है कि ज्यादा जरूरत हो तो पानी भेज दिया जाएगा. दिन में 2 टैंकर पानी तो जाता ही है.”

बस्ती में रहने वाले शरणार्थियों  की संख्या को लेकर पवन कुमार शर्मा ने कहा, “बस्ती में लोगों का डाटा रोज  बदलता रहता है. लोग लगातार बढ़ते जा रहे हैं. पहले 30-35 लोग आए थे. अब सैकड़ों लोग हो गए हैं.”

आधार कार्ड की समस्या को लेकर उन्होंने न्यूज़सेन्ट्रल24×7  को बताया , “स्कूल में सभी बच्चों के एडमिशन हो रहे हैं. लेकिन जिन बच्चों के आधार इत्यादि की समस्या है उसके लिए अन्य प्रक्रियायों और टाइम बॉन्डेशन का पूरा होने जरूरी है. जैसे- वे लोग कितने दिनों से दूसरे देश में रह रहे हैं. जिसके बाद आधार कार्ड या वोटर आई-कार्ड बनेगा. लेकिन कुछ बच्चों के आधार कार्ड बने हैं और उनका  स्कूल में एडमिशन भी हुआ है.”

बता दें कि, न्यूज़सेन्ट्रल24×7  ने इस मामले को लेकर केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन और भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी से बात करने की कोशिश की. लेकिन काफी बार फोन करने के बावजूद उन्होंने फोन नहीं उठाया.

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