कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सड़कें सुनसान हो गईं तो, संसद आवारा हो जाएगी- डॉ राम मनोहर लोहिया

जब भूख और ज़ुल्म दोनों चीजें बढ़ जाती हैं तो चुनाव से पहले भी सरकारें बदली जा सकती हैं.

भारत की आज़ादी के लिए स्वतंत्रता सेनानी के रूप में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डॉ राम मनोहर लोहिया सकारात्मक विचार और गंभीर व्यक्तित्व वाले इंसान थे. जिनके विचार आज भी हमारे लिए प्रेरणादायक हैं.

डॉ राम मनोहर लोहिया का जन्म 23 मार्च 1910 को हुआ था. लेकिन डॉ लोहिया अपना जन्मदिन नहीं मनाते थे क्योंकि इस दिन शहीद-ए-आज़म भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का शहादत दिवस है.

  • ज़िन्दा कौमें सरकार बदलने के लिए पांच साल तक इंतज़ार नहीं करतीं. वह किसी भी सरकार के ग़लत कदम का फौरन विरोध करती है.
  • यदि एक समाजवादी सरकार बल प्रयोग करे, जिसके परिणामस्वरूप कुछ लोगों की मौत हो जाए तो उसे शासन करने का कोई अधिकार नहीं है.
  • भारत में असमानता सिर्फ आर्थिक नहीं है. यह सामाजिक भी है.
  • सड़कें सुनसान हो गईं तो, संसद आवारा हो जाएगी.
  • जब भूख और ज़ुल्म दोनों चीजें बढ़ जाती हैं तो चुनाव से पहले भी सरकारें बदली जा सकती हैं.
  • धर्म दीर्घकालीन राजनीति है, राजनीति अल्पकालीन धर्म. धर्म का काम है अच्छा करें और उसकी स्तुती करें, राजनीति का काम है बुराई से लड़े और उसकी निंदा करें.
  • जब इतिहास के पन्ने गांधी जी की हत्या को कट्टरपंथी उदार हिंदुत्व के युद्ध की एक घटना के रूप में रखेंगे और उन सभी पर अभियोग लगाएंगे, जिन्हें वर्णों के ख़िलाफ़ और स्त्रियों के हक में समपत्ति के ख़िलाफ़ और सहिष्णुता के हक में  गांधी जी के कामों से गुस्सा आया था तब शायद हिंदू धर्म की निष्क्रियता और उदासीनता नष्ट हो जाए.
  • जब तक हिंदुओं के दिमाग से वर्ण भेद बिल्कुल ही खत्म नहीं होते या स्त्री को बिल्कुल पुरुष के बराबर नहीं माना जाता या संपत्ति और व्यवस्था को पूरी तरह से तोड़ा नहीं जाता. तब तक कट्टरता भारतीय इतिहास में अपना विनाशकारी काम करती रहेगी और उसकी निष्क्रियता को कायम रखेगी.
  • मुझे अकसर लगता है कि दार्शनिक हिंदू खुशहाल होने पर गरीबों से पशुओं जैसा, पशुओं से पत्थरों जैसा और अन्य वस्तुओं से दूसरी वस्तुओं की तरह व्यवहार करता है. शाकाहार और अहिंसा गिरकर छिपी हुई क्रुरता बन जाते हैं. अब तक की सभी मानवीय चेष्ठाओं के बारे में कहा जा सकता है कि एक स्थिति में हर जगह सत्य क्रुरता में बदल जाता  है और सुंदरता अनैकिता में, लेकिन हिंदू धर्म के बारे में यह औरों के अपेक्षा  ज्यादा सच है.
  • मैं नहीं जानता कि ईश्वर है या नहीं, लेकिन मैं इतना जानता हूं कि सारे जीवन और सृष्टि को एक में बंधने वाली ममता की भावना है. हालांकि अभी वह दुर्लभ भावना है.
  • हिंदू धर्म दरअसल में है क्या, इसका कोई एक उत्तर नहीं है बल्कि कई उत्तर है. इतना निश्चित है कि हिंदू धर्म कोई खास सिद्धान्त या संगठन नहीं है, न विश्वास और व्यवहार का कोई नियम उसके लिए अनिर्वाय ही है, स्मृतियों और कथाओं, दर्शन और रीतियों की एक पूरी दुनिया है जिसका कुछ हिस्सा बहुत ही बुरा है और कुछ हिस्सा ऐसा है जो मनुष्य के काम आ सकता है. इन सब से मिलकर हिंदू दिमाग बनता है. जिसकी विशेषता कुछ विद्वानों ने सहिष्णुता और विविधता में एकता बताई है.
  • जब भी भारत में एकता या  खुशहाली आई तो हमेशा वर्ण, स्त्री, संपत्ति आदि सहिष्णुता के संबंध में हिंदू धर्म में उदारवादियों का प्रभाव अधिक था. हिंदू धर्म में कट्टरपंथी जोश बढ़ने पर हमेशा देश सामाजिक और राजनीतिक दृष्टियों से टूटा है और भारतीय राष्ट्र में राज्यों और समुदायों के रूप में बिखराव आया है. मैं नहीं कह सकता कि ऐसे सभी काल जिनमें देश टूट कर छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया कट्टरपंथी प्रभुता के काल थे लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि देश में एकता तभी आई जब हिंदू दिमाग पर उदार विचारों का प्रभाव था.
  • कट्टरपंथी हिंदू अगर सफल हुए तो चाहे उनका उद्देश्य कुछ भी हो भारतीय राज्य के टुकड़े कर देंगे. न सिर्फ हिंदू मुस्लिम दृष्टि से बल्कि वर्णों और प्रांतों की दृष्टि से भी. केवल उदार हिंदू ही राज्य को कायम कर सकते हैं. अतः 5 हजार वर्षों से अधिक की लड़ाई अब इस स्थिति में आ गई है कि एक राजनीतिक समुदाय और राज्य के रूप में हिंदुस्तान के लोगों की हस्ती ही इस बात पर निर्भर है कि हिंदू धर्म में उदारता की कट्टरता पर जीत हो.
  • भारत में कौन राज करेगा ये तीन चीजों से तय होता है. ऊंची जाति, धन और ज्ञान. जिनके पास इनमें से कोई दो चीजें होती हैं वह शासन कर सकता है.
  • मैं भारतीय इतिहास का ऐसा एक भी काल नहीं जानता जिसमें कट्टरपंथी हिंदू धर्म भारत में एकता या ख़ुशहाली ला सका हो.
  • बेशर्म, नालायक, पाजी मर्द ही अपनी औरत के ऊपर हाथ उठाएगा. कोई भला मर्द किसी भी हालत में औरत पर हाथ नहीं उठाएगा.
  • एक स्त्री और पुरूष के बीच बलात्कार और वादाख़िलाफ़ी के अलावा सारे रिश्ते वैध होते हैं.
  • भारतीय नारी द्रौपदी जैसी हो, जिसने कभी भी किसी पुरुष से दिमागी हार नहीं खाई.
  • नारी को गठरी के समान नहीं बल्कि इतनी शक्तिशाली होनी चाहिए कि वक्त पर पुरुष को गठरी बना अपने साथ ले चले.
  • जाति तोड़ने का सबसे अच्छा उपाय है, कथित उच्च और निम्न जातियों के बीच रोटी और बेटी का संबंध.
  • हमें समृद्धि बढ़ानी है, कृषि का विस्तार करना है, फैक्ट्रियों की संख्या अधिक करनी है लेकिन हमें सामूहिक सम्पत्ति बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए; अगर हम निजी सम्पत्ति के प्रति प्रेम को ख़त्म करने का प्रयास करें, तो शायद हम भारत में एक नए समाजवाद की स्थापना कर पाएं.
  • हिंदुस्तान की ज़िंदगी के सबसे बड़े पांच मकसद बराबरी, जनतंत्र, विकेन्द्रीकरण, अहिंसा और समाजवाद है.
  • लोगों के छोटे समूहों को शक्ति देकर, प्रथम श्रेणी का लोकतंत्र संभव है.
  • भारत में असमानता सिर्फ आर्थिक नहीं है; यह सामाजिक भी है.
  • जात-पात भारतीय जीवन की सबसे सशक्त प्रथा रही है, यहाँ जीवन जाति की सीमाओं के भीतर ही चलता है.
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