कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

दिल्ली विश्वविद्यालयः पुलवामा हमले पर टिप्पणी करने पर छात्र ने अध्यापक के साथ की मारपीट

संयुक्त छात्र-शिक्षक परामर्श समिती ने छात्र देवेंद्र बराला को ऐसे व्यवहार के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एक अतिथि शिक्षक पर कथित रूप से एक छात्र द्वारा हमले की खबर सामने आयी है. वहीं, छात्र ने दावा किया है कि शिक्षक ने पुलवामा हमले में शहीद सीआरपीएफ़ जवानों की मौत पर ‘अपमानजनक’ बयान दिया था.

शिक्षक ने पुलिस में शिकायत दर्ज की है. वहीं, छात्र देवेंद्र बराला संयुक्त छात्र-शिक्षक परामर्श समिती की तरफ से बराला के इस व्यवहार के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. देवेंद्र दिल्ली विश्वविद्यालय के लॉ विभाग के तीसरे वर्ष के छात्र हैं. लॉ विभाग की डीन ने कहा कि विभाग इस मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन करेगा. बता दें कि शिक्षक अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते.

वहीं, टाइम्स ऑफ इंडिया को प्रोफेसर ने बताया कि, “ मैंने कभी भी इस तरह का बयान नहीं दिया है. छात्र ने मेरे साथ मारपीट की और मुझे मौरिस नगर पुलिस स्टेशन ले गया. लेकिन मैं उसके ख़िलाफ़ मारपीट का मामला दर्ज करवा पाया.”

वहीं, देवेंन्द्र बराला में डीन और डीयू के कुलपति को लिखे पत्र में दावा किया है कि “पुलवामा हमले के दिन,उसने कक्षा के बाहर प्रोफेसर को इस घटना का एक वीडियो दिखाने की कोशिश की. लेकिन शिक्षक ने वीडियो को प्रचार प्रसार का दावा करते हुए देखने से इनकार कर दिया. प्रोफेसर ने कहा कि उनके लिए दुखी क्या होना जो वहां मरने के लिए ही हैं,” वहीं, बराला का आरोप है कि अगले दिन भी शिक्षक अपनी बात अटके रहे.

शिक्षक ने दावा किया कि, “ छात्र उन्हें व्हाट्सएप पर  विडियो दिखाने की कोशिश कर रहा था. तब मैने छात्र को समझाते हुए यह कहा था कि सोशल मीडिया पर आए विडियो अक्सर नकली या फिर प्रचार प्रसार का हिस्सा होता है.”

बराला ने 20 फरवरी को टाइम्स ऑफ़ इंडिया  को बताया कि “उसके शिक्षक ने उससे यह बात कही कि उत्तरपूर्वी राज्यों और झारखंड में भी जवान मर रहे हैं, मुझे भावुक नहीं होना चाहिए. इसके बाद मैं प्रोफेसर को इस ‘देश विरोधी’ बयान के लिए उन्हें लेकर पुलिस स्टेशन गया. लेकिन, पुलिस ने मेरे ख़िलाफ़ ही मामला दर्ज कर लिया. “

दूसरी तरफ प्रोफेसर ने कहा कि बराला ने ही आकर उससे हमले के बारे में अपना विचार पूछा, “मैंने उनसे कहा ‘यह एक निंदनीय घटना है और आतंक का कोई औचित्य नहीं है’. मैंने उनसे यह भी कहा कि ‘हमें सरकार की आलोचना भी करनी चाहिए.” लेकिन, छात्र को यह पसंद नहीं आया और उसने मुझ पर हमला किया और मुझे पुलिस स्टेशन ले गया.

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